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Thursday, April 1, 2010

सुबह के पंचरंगी प्रसारण की साप्ताहिकी 1-4-10

शुक्रवार को छोड़ कर सप्ताह के हर दिन परम्परा के अनुसार शुरूवात संकेत धुन से हुई जिसके बाद वन्देमातरम फिर बताए गए दिन और तिथि, संवत्सर तिथि भी बताई गई जिसके बाद मंगल ध्वनि सुनवाई गई। यह सभी क्षेत्रीय केंद्र से प्रसारित हुआ। इसके बाद 6 बजे दिल्ली से प्रसारित हुए समाचार, 5 मिनट के बुलेटिन के बाद मुम्बई से प्रसारण शुरू हुआ जिसकी शुरूवात में कभी-कभार सुबह के कार्यक्रमों के प्रायोजकों के विज्ञापन प्रसारित हुए जिसके बाद पहले कार्यक्रम वन्दनवार की शुरूवात मधुर संकेत धुन से हुई, फिर सुनाया गया चिंतन।

शुक्रवार को प्रसारण की शुरूवात देर से हुई, शायद तकनीकी कारण से। वन्देमातरम के बाद रिले प्रसारण शुरू हुआ और समाचार शुरू हो चुके थे। समाचार के बाद कुछ समय संगीत सुना फिर जब जुड़े तो चिंतन के अंतिम शब्द कानो में पड़े जिससे कथन का पता नही चला।

चिंतन में इस बार शामिल रहे कथन - व्यास जी का कथन - माता के रहते चिंता नहीं रहती। तुकाराम का कथन - मेघ वर्षा करते समय उसर और उपजाऊ भूमि को समान रूप से सींचते हैं और गंगा का जल सबको पवित्र करता हैं, इतना बढ़िया कथन किसी और दिन अच्छा लगता क्योकि इस दिन महावीर जयंती थी, अच्छा होता भगवान महावीर का कोई सन्देश बताते। महात्मा गांधी के दो कथन बताए गए - मीठी बोली मन की कड़वाहट मिटाती हैं। दूसरा कथन - जो अपने दायित्व का निर्वाह नही करता उसका अपने अधिकारों के लिए चिंता करना ठीक नही। सरदार वल्लभ भाई पटेल का कथन - कितना ही धन प्राप्त कर ले, साथ नही जाता, हम अपने पीछे कीर्ति ही छोड़ जाते हैं, यह कथन स्पष्ट नही बताया गया। आज स्वामी रामतीर्थ का कथन बताया गया - त्याग का अर्थ किसी व्यक्ति या वस्तु को छोड़ना नही हैं बल्कि उससे ऐसा सम्बन्ध बनाना हैं कि उसमे विविधता के दर्शन हो। अच्छा होता आज शिक्षा से सम्बंधित या बच्चो से सम्बंधित कोई विचार बताया जाता क्योंकि इस सन्दर्भ में देश में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया हैं और आज से लागू किया गया हैं।

वन्दनवार कार्यक्रम में इस बार भी फिल्मी घुसपैठ जारी रही। विनम्र अनुरोध है कृपया फिल्मी भक्ति गीतों का अलग कार्यक्रम रखिए ऐसे समय जहां क्षेत्रीय कार्यक्रमों का समय न हो ताकि हम इन फिल्मी भक्ति गीतों का आनंद ले सके।

सप्ताह भर विविध भक्ति गीत सुने - माँ सरस्वती की आरती सुनवाई गई।

साकार रूप के भक्ति गीत - जय भोला भंडारी शिव हैं

निराकार रूप के भक्ति गीत शामिल रहे - चदरिया झीनी रे

पुराने लोकप्रिय भजन सुनवाए गए -

तू ही दुर्गा तू ही भवानी
तू जननी तू जग कल्याणी

प्रार्थना भी शामिल रही -

परम पिता शिव परमात्मा
गाए जन जन की आत्मा

भक्तों के भक्ति गीत जैसे -

रंग रसिया मैं बावरिया जग भूली
मुझको लागी तेरी लगन

एकाध ऐसा भक्ति गीत भी शामिल रहा जो शायद नया हैं या कम सुनवाया जाता हैं -

जनम सफल होगा रे बन्दे मन में राम बसा ले

कार्यक्रम का समापन देशगान से होता रहा, प्रसिद्ध साहित्यकारों जैसे सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, सुमित्रा नंदन पन्त जी के गीत सुनवाए -

भारत माता ग्राम वासिनी

भारती जय विजय करे

और यह नया गीत -

देश के बेटो सो न जाना
अभी तो मंजिल बाक़ी हैं

लोकप्रिय देशभक्ति गीत सुनवाए गए जैसे -

चलो देश पर मर मिट जाए
मिल कर भारत नया बनाए

ये देश हैं मेरा धरा मेरी गगन मेरा

केवल एक गीत सुनवाते समय विवरण बताया - सुरेश अनोखा की रचना और दर्शन सिंह का संगीत -

ऐ वतन ऐ वतन जिंदाबाद

6:30 बजे से क्षेत्रीय प्रसारण में तेलुगु भक्ति गीत सुनवाए गए जिसके बाद 6:55 को झरोका में केन्द्रीय और क्षेत्रीय प्रसारण की जानकारी तेलुगु भाषा में दी गई जिसमे शनिवार को अजीब बात हुई, शुक्रवार के कार्यक्रमों की जानकारी दी गई जैसे 3 बजे सखी सहेली, 7:45 पर लोक संगीत। सोमवार को पार्श्व संगीत जोर से बजता रहा जिससे विवरण सुनना कठिन हो गया।

7 बजे भूले-बिसरे गीत कार्यक्रम के दूसरे भाग से हम जुड़े। यह भाग प्रायोजित रहा। शुक्रवार को गुमनाम, जागते रहो, जबक फिल्मो के साथ जिन्दगी और हम फिल्म का यह गीत भी सुनवाया गया जो कम ही सुनवाया जाता हैं -

जा रे जा रे मोरी छोड़ चुनरिया

शनिवार को सुना तलत महमूद और सुरैया का लोकप्रिय गीत - राही मतवाले, इसके साथ एकाध और अपने समय के लोकप्रिय गीत शामिल रहे और साथ ही हमेशा से ही कम सुनवाए जाने वाले गीत भी सुनवाए गए उस्ताद, सूरत और सीरत फिल्म का यह गीत -

तुझे गीत मेरा सुलाए जगाए

रविवार को यह कार्यक्रम संगीतकार एस एन त्रिपाठी की पुण्यस्मृति में समर्पित किया गया। उनके विभिन्न रंगों के गीत सुनवाए जैसे -

लाल किला फिल्म की गजल - न किसी की आँख का नूर हूँ

वीर दुर्गादास फिल्म का लोकगीत - थाने काजलिया बना लूं

शास्त्रीत पद्धति में ढला मन्नाडे का गाया गीत - उड़ जा भंवर

अमृत मंथन फिल्म का शांत गीत - चाँद ढलने लगा आ भी जा पिया

इस तरह इस संगीतकार के सभी पहलू उभर कर आए, बढ़िया चुनाव।

सोमवार को छोटी छोटी बाते, दूज का चाँद, कैदी, एक गाँव की कहानी फिल्मो के गीतों के साथ सुरैया का शमा फिल्म का यह गीत भी शामिल था -

धड़कते दिल की तमन्ना हो मेरा प्यार हो तुम

मंगलवार को गीतकार आनंद बक्षी को समर्पित रहा कार्यक्रम। उनके जीवन और काम की हलकी सी जानकारी दी। उनके कुछ लोकप्रिय गीत सुनवाए जैसे जुआरी फिल्म से - नींद उड़ जाए तेरी चैन से सोने वाले, मिस्टर एक्स इन बाम्बे का गीत और फिल्म फूल बने अंगारे से कम सुना जाने वाला गीत भी शामिल था।

बुधवार को यह कार्यक्रम अभिनेत्री मीनाकुमारी की पुण्यस्मृति में समर्पित किया गया। उनकी फिल्मो के विभिन्न मूड के गीत सुनवाए -

न जाओ सैय्या छुडा के बैय्या

दिल अपना प्रीत पराई का शीर्षक गीत, दिल एक मंदिर और बहू बेगम फिल्म से -

दुनिया करे सवाल तो हम क्या जवाब देगे

बैजूबावरा फिल्म का युगल गीत और उनकी लोकप्रिय फिल्म शरारत से रफी साहब का गाया गीत भी शामिल था। इस तरह गीतों के चुनाव में विविधता अच्छी लगी।

आज का दिन दो रूपों में महत्वपूर्ण हैं - शिक्षा का अधिकार नियम आज से लागू हुआ और आज पहली अप्रैल हैं, हंसने-हंसाने का दिन। यह दिन का पहला प्रसारण हैं और फिल्मी गीतों का यह पहला कार्यक्रम और वह भी गैर फरमाइशी गीतों का और इसमे इन सब बातो की झलक तक नही मिली। गीत सुनवाया गया -

अब क्या मिसाल दूं मैं तुम्हारे शबाब की

और ऐसे ही प्यार-मोहब्बत के गीत मेरी सूरत तेरी आँखे, एक फूल चार कांटे, घूंघट, एक राज फिल्मो से और दिल एक मंदिर फिल्म का शीर्षक गीत भी शामिल था। मानते हैं कि गीतों का चुनाव पहले ही हो जाता हैं इसीलिए शिक्षा और बच्चो संबंधी गीत नही चुने जा सके पर पहली अप्रैल को ध्यान में रखकर गीत चुने जा सकते थे। पुराने बहुत से मजेदार गीत हैं।

इस कार्यक्रम में फिल्मो और फिल्मी गीतों के बारे में सामान्य जानकारी भी दी जाती रही।

7:30 बजे संगीत सरिता में श्रृंखला प्रसारित हो रही हैं - पार्श्व गायन के रंगीन ताने-बाने जिसे प्रस्तुत कर रही हैं प्रसिद्ध सरोद वादिका जरीन शर्मा। बताया गया की गीत राग के आधार पर बनाए जाते हैं इसीलिए शास्त्रीय संगीत से अलग होते हैं और कभी अच्छे लगते हैं कभी अच्छे नही लगते। राग पर आधारित फिल्मी गीतो के साथ वाद्य संगीत भी सुनवाया गया।

शुक्रवार को सुनवाया फिल्म दिल एक मंदिर का गीत। शनिवार को हेमंत कुमार का तैयार किया गया नागिन फिल्म का गीत और सलिल चौधरी के संगीत की भी चर्चा हुई, परख फिल्म का गीत सुना - ओ सजना

रविवार की कड़ी में संगीतकार रवि द्वारा अप्रचलित राग में तैयार काजल फ़िल्म का गीत सुनवाया -

छू लेने दो नाजुक ओठो को

कुछ और गीत भी शामिल हुए जिनके संगीत पर चर्चा हुई -

मन्नाडे का गाया मेरे हुजुर फिल्म का गीत - झनक झनक तोरी बाजे पायलिया

बैजूबावरा फिल्म से - मन तड़पत हरी दर्शन को आज

सोमवार को चर्चा में रहे गीत - नौशाद का फिल्म दिल दिया दर्द लिया का गीत, जयदेव का गीत - तू चन्दा मैं चांदनी, सी रामचंद्र द्वारा तैयार लोरी - धीरे से आ जा रे अखियन में निंदिया

मंगलवार को चर्चा में रहे संगीतकार खैय्याम। राग पहाडी पर आखिरी ख़त फिल्म का गीत सुनवाया -

बहारो मेरा जीवन भी संवारो

बुधवार को एस डी बर्मन द्वारा राग अहीर भैरव पर आधारित फिल्म मेरी सूरत तेरी आँखे से यह गीत -

पूछो न कैसे मैंने रैन बिताई

और आर डी बर्मन द्वारा राग मिश्र शिवरंजनी पर आधारित महबूबा फिल्म से यह गीत -

मेरे नैना सावन भादों

चर्चा में रहे।

इस श्रृंखला का फिर से प्रसारण हो रहा हैं जिसे तैयार किया था छाया (गांगुली) जी ने। वैसे भी नए कार्यक्रम कम ही प्रसारित होते हैं।

आज से शिक्षा का अधिकार क़ानून लागू हुआ हैं इस अवसर पर दिल्ली से प्रधानमंत्री का सन्देश हिन्दी और अंग्रेजी में प्रसारित हुआ जिसके बाद बच्चो के दो गीत सुनवाए गए -

बच्चो तुम तक़दीर हो कल के हिन्दुस्तान की

नन्हे-मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या हैं

7:45 को त्रिवेणी में शुक्रवार को अच्छा विचार रहा - जिन्दगी में छोटी- छोटी खुशिया भी बहुत मायने रखती हैं। आपकी कसम फिल्म के गीत के साथ सुनवाया गया यह गीत भी -

प्यार का समय कम हैं जहां
लड़ते हैं लोग कैसे वहां

शनिवार को भी बढिया विचार रहा - बहुत खराब लगता हैं जब पढ़े-लिखे लोग नियम क़ानून को ताक पर रख देते हैं। अच्छा आलेख और गीत -

पढोगे लिखोगे तो होगे नवाब
खेलोगे कूदोगे तो बनोगे खराब

प्रकृति से छेड़-छाड़ की भी बात चली और महिलाओं पर किए जाने वाले अत्याचार की भी चर्चा हुई -

कोमल हैं कमजोर नही

रविवार का विषय था - जिन्दगी में क़दम-क़दम पर सवालों का सामना करना पड़ता हैं। गीत भी अच्छे चुने गए, पुराने गीत बहु बेगम फिल्म से और यह गीत -

एक सवाल मैं करूं एक सवाल तुम करो

नया गीत मैंने प्यार किया फिल्म से भी शामिल था।

सोमवार को मजा आ गया, रात में निकलने वाले महाशय चोर की चर्चा रही, ऐसे में जाहिर हैं चोरी मेरा काम फिल्म का गीत सुनवाया जाता, यह गीत भी शामिल रहा -

शहरों की गलियों में जब अन्धेरा होता हैं

चर्चा आगे बढ़ती गई और टैक्स चोरी की भी बात हुई।

मंगलवार को चर्चा चली कि श्रम भी करे और आराम भी। आलेख में बताया गया श्रम करे, आराम भी करे पर आलसी न बने, व्यायाम भी करे यानी सभी के लिए बाते बताई गई पर गीतों के चुनाव में असावधानी रही, केवल श्रमिक वर्ग के गीत सुनवाए -

साथी हाथ बढ़ाना

मेहनतकश इंसान जाग उठा

बुधवार को पुराने अंक का प्रसारण दुबारा किया गया जिसमे बताया गया कि जिन्दगी को देखने का सबका अपना नजरिया हैं। गीत भी उपयुक्त चुने गए -

जिन्दगी हैं खेल कोई पास कोई फेल

कभी सुख तो कभी दुःख हैं

पिया का घर फिल्म का गीत भी शामिल था। अच्छा अंक हैं इसीलिए दुबारा प्रसारण भी अच्छा लगा।

और आज चर्चा की गई उनकी जो दूसरो को प्रेरणा देते हैं। गीत सुनवाए गए -

मधुबन खुशबू देता हैं

पहचान और नई फिल्म का गीत भी शामिल था। ऎसी आदर्शवादी बातो के लिए तो पूरा साल पडा हैं कम से कम आज एक दिन कुछ हंसते-हंसाते तो अच्छा लगता।

प्रसारण के दौरान रविवार यानी 4 अप्रैल से कार्यक्रमों में किए जा रहे परिवर्तन की सूचना देते हुए रविवार को शाम 4 बजे एक घंटे के उजाले उनकी यादो के, कार्यक्रम के बारे में बताया।

इस प्रसारण को अशोक हमराही जी, निम्मी (मिश्रा) जी, युनूस (खान) जी ने शशांक (काटगरे) जी, राजीव (प्रधान) जी, जयंत (महाजन) जी, मंगेश (सांगले) जी के तकनीकी सहयोग से हम तक पहुँचाया गया और यह कार्यक्रम श्रोताओं तक ठीक से पहुँच रहा है, यह देखने (मानीटर) करने के लिए ड्यूटी रूम में ड्यूटी अधिकारी रहे आशा नायकम जी, वसुंधरा (अय्यर) जी।

सवेरे के त्रिवेणी कार्यक्रम के बाद क्षेत्रीय प्रसारण तेलुगु भाषा में शुरू हो जाता है फिर हम दोपहर 12 बजे ही केन्द्रीय सेवा से जुडते है।

1 comment:

संजय भास्कर said...

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com
Email- sanjay.kumar940@gmail.com

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