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Tuesday, August 12, 2008

घन्यवाद श्री मोदी साहब

आदरणीय श्री महेन्द्र मोदी साहब,
नमस्कार
यह जान कर खुशी हुई कि आप रेडियोनामा के नियमीत वाचक है और आपने इस पर जवाब दिया वह भी सराहनिय कार्य है कि आप इतनी व्यस्तता से समय निकालते है । हाँ, मूझे याद है कि एक बार पत्रावली कार्यक्रममें मेरे ही पत्र को ले कर मेरे नाम को बोले विना एक निवेदन किया था कि व्यक्तिगत सम्बोधन वाले पत्रके उत्तर आप कहीं और देगे पर आप इस ब्लोग पर भी देगे वह विचार नहीं आया था पर एक बात मैनें मेरे विविध भारती पर लिखे पत्र या इस टिपणी या पोस्ट में भी स्पष्ट लिख़ी ही है कि मेरा कोई य? व्यक्तीगत दोषारोपण का इरादा नहीं है और जो कर्यक्रम बने इसकी गुणवत्ता तो बेहतरीन थी ही। पर मैनें सिर्फ़ इतना अफ़सोस ही जटाया है कि यह स्वर्ण जयन्ती महोत्सव के समापन के बाद यह सिलसिला और क्षेत्रों तक विस्तृत होने की सम्भवना नहीं रहेगी और यह बात तो अगर छुट जाने वाले क्षेत्रों के श्रोता लोग या इस प्रकार के व्यक्ति विषेष के नज़रिये से तो आप को भी सही लगेगी । इस मतलब की एक पोस्ट इस ब्लोग की नियमीत लेख़ीका हैद्राबाद की श्रीमती अन्नपूर्णाजी ने कई हप्ते पहेले लिख़ी है । यहाँ इन बेहतरीन प्रस्तूतीयोँ के लिये तो मैं आपका और आपकी टीम का कद्रदान हूँ ही और कभी कभी तो आप की मेहनत और परिस्थिती को सोच कर विविध भारती की टीम का समर्थन करते हुए इस ब्लोग के अन्य सदस्यों की नाराझगी भी पाई है, यहाँ यह बात मैं जरूर बताता हूँ कि क्या होना चाहीए पर साथ यह भी स्वीकार करता हूँ, कि कोई बात पर अगर आप श्रोतामत से सम्मत भी होते है तो भी परिस्थितीयाँ या उपर से तय की गई निती के अनुसार ही अफ़सर लोग या अन्य कर्मशीलो को चलना होता है और इस बारेमें कोई स्पष्टता भी नहीं हो सकती है । मेरे मनमें आप और आपके करीब सभी साथियोँ के लिये आदर कायम है । हाँ, मेरी एक ही कमज़ोरी है कि मैं मेरे मनकी बात को ज़बान से या लिख़ाई द्वारा मन से निकाल देता हूँ । आप जल्दी ही आम स्वास्थ पाये ऐसी शुभ: कामना ।
आपका शुभ: चिन्तक,
पियुष महेता ।

1 comment:

योगेन्द्र मौदगिल said...

शुभकामनाएं पूरे देश और दुनिया को
उनको भी इनको भी आपको भी दोस्तों

स्वतन्त्रता दिवस मुबारक हो

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