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Friday, June 13, 2008

विविध भारती की रसोई में सखि- सहेली

जहाँ तक मेरी जानकारी है विविध भारती पर महिलाओं के लिए विशेष रूप से तैयार किया जाने वाला पहला कार्यक्रम है - सखि-सहेली।

वैसे विविध भारती का स्वरूप ही कुछ ऐसा रहा कि कार्यक्रमों के तो अलग-अलग वर्ग रहे जैसे शास्त्रीय संगीत, फ़िल्मी संगीत, लोक संगीत, कविताएँ, वार्ताएँ, नाटक, प्रहसन पर श्रोताओं के अलग-अलग वर्ग नहीं रहे। अब तो दो वर्ग स्पष्ट है - युवाओं का यूथ एक्स्प्रेस और महिलाओं की सखि-सहेली।

सप्ताह के पाँच दिनों में से सोमवार को सखि-सहेली रसोई पर ध्यान देती है। भले ही विविध भारती पर शायद यह पहली बार हो पर आकाशवाणी में हमेशा से ही महिलाओं के कार्यक्रम और उसमें रसोई के कार्यक्रम रहे है।

मेरी दीदी का आकाशवाणी हैदराबाद के इस कार्यक्रम में पहले कुछ ज्यादा ही योगदान हुआ करता था। वह जब भी कार्यक्रम देती उसमें विविधता रखती थी जैसे - मिठाई, नमकीन, विशेष सब्जी बनाना और विधि बाताते समय वह पौष्टिकता भी बतातीं थी। इन दोनों ही बातों का न होना सखि-सहेली में मुझे कुछ खटकता है।

सखि-सहेली में कभी एक ही चीज़ बनाना बताते है कभी दो या तीन। कई बार बहुत ही साधारण सी चीज़े बताई जाती है जैसे मख़ाने की खीर। कभी-कभी तो ऐसी चीज़े बताई जाती है जिन्हें सुन कर लगता है कहीं सखियाँ मज़ाक तो नहीं कर रही वैसे आज पहली अप्रैल तो नहीं है - जब बतातीं है कि करेले की कचौरी कैसे बनती है।

अच्छा तो तब लगता है जब शक्करकंद की पूरिया, शाकाहारी कवाब, आँवले का अचार, बेसन केसर बर्फ़ी बनाना बताया जाता है।

कभी कुछ ग़लत भी लगता है जैसे एक बार पना बनाने के लिए बताया गया कि थोड़े से रिफ़ाइंड तेल में ज़ीरे को भून कर डालना चाहिए। मुझे लगता है कि गर्मी में बनाए जाने वाले इस पना में भूना ज़ीरा जरूर डाला जाता है पर अक्सर ज़ीरे को पहले से ही भून कर रख लिया जाता है क्योंकि गरम तेल डाल कर बनाया गया पना गर्मी में शायद ही पिया जा सकेगा।

सबसे अच्छी लगी अगरसा बनाने की विधि। यह ऐसी चीज़ है जो सभी क्षेत्रों में नहीं बनाई जाती बल्कि कई क्षेत्र के लोग तो जानते भी नहीं। अच्छा होगा अगर ऐसी ही चीज़ों के बारे में ज्यादा बताया जाए। हमारे देश में इतने राज्य है और सभी राज्यों के कुछ ख़ास पकवान होते है जैसे -

गुजरात का ढोकला, खाखरा मुंबई की ख़ास भेलपूरी राजस्थान की कचौड़ियाँ, दक्षिण का इडली, डोसा, साँभर। वैसे ये चीज़े अन्य राज्यों में खाने को तो मिल जाती है पर कुछ विशेष चीज़े ऐसी है जिन्हें खाना तो दूर की बात रही जिनके बारे में जानकारी भी बहुतों को नहीं है जैसे -

बंगाली सब्जी जिसका नाम शायद दम्बोख़्त है जो शायद आलू या जिमीकन्द से बनती है ऐसा ही एक और नाम है पाश्ता या शायद पोश्ता जो शायद करेले से बनती है। इसके अलावा मछली या परवल का झोल भी बनाया जाता है। इनके तो नाम भी ठीक से पता नहीं है। आकाशवाणी के क्षेत्रीय केन्द्रों की सहायता से ऐसे पकवान बताए जा सकते है। साथ ही थोड़ी सी जानकारी पौष्टिकता की भी दी जाए तो सोमवार की सखि-सहेली स्वादिष्ट हो जाए।

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