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Monday, June 23, 2008

'एक स्टेशन व्रत' रेडियो के निर्माता; जगदीश शाह

(दाढ़ी वाले जगदीश भाई हैं )<
१९६३ में वडोदरा जिले की सावली तहसील तहसील में कार्यरत युवा सर्वोदयी कार्यकर्ता जगदीश शाह का वेतन सौ रुपए था। जापानी सेट असी रुपये का मिलता था , कैसे खरीदते ?'रेडियो जगत' नामक गुजराती पत्रिका के वे नियमित पाठक थे। इसमें तीन ट्रांजिस्टर वाले सेट बनाने की विधि और उसका सर्किट दिया हुआ था। इस विधि से सेट बनाने के लिए बाजार से ३५ रुपए का सामान खरीदना पड़ता। सामाजिक जीवन की सक्रियता के में से रात बेरात जग कर जगदीश भाई ने जो ट्रांजिस्टर सेट बनाया वह सिर्फ़ एक स्टेशन पकड़ता था- उनके सर्वोदयी बन्धु इस गुण की तुलना - 'एक पत्नी व्रत' से करते और कुछ इसे ब्रह्मचारी रेडियो कहते। गुजरात का पहला रेडियो स्टेशन भी वडोदरा का था जो बाद में वडोदरा-अहमदाबाद संयुक्त स्टेशन बना।वडोदरा से स्टेशन न हते इसके लिए आन्दोलन भी हुआ था। राजकोट और भुज स्टेशन बाद में बने।
रविवार शाम ४ बजे इस स्टेशन से 'विसराता सुर' नामक कार्यक्रम में हिन्दी फिल्मों के भूले बिसरे गीत आते तब जगदीश भाइ ध्यान मग्न हो सुनते।
जगदीश भाई से हिन्दी फिल्मों के रेडियो प्रसारण के अनेक रोचक तथ्य जानने को मिले। जवाहरलाल नेहरू की कैबिनेट में सूचना प्रसारण मन्त्री श्री केसकर पर 'शास्त्रीय संगीत लॉबी' का दबाव पड़ा था जिसके चलते आकशवाणी पर फिल्मी गीत और हारमोनियम नहीं बजते थे। लोग रेडियो सिलोन और रेडियो गोआ पर हिन्दी फ़िल्मी गीत सुनते। हारमोनियम पर रोक का किस्सा कुछ तकनीकी है , फिर कभी।
१५ अगस्त १९५३ को जगदीश भाई ने सर्वोदय आन्दोलन के लिए जीवन समर्पित किया , उसके पहले हर हफ़्ते तीन हिन्दी और एक अंग्रेजी फिल्म देखने का नियम था।घर से दो रुपये हफ़्ता पॉकेट खर्च मिलता।एक आने का टिकट के हिसाब से चार आने खर्च हो जाते ! -यह उन्हें मंजूर नहीं था। इसलिए एक अन्य शौक से धनोपार्जन करते-डाक टिकट संग्रह द्वारा। सैंकड़ों भारतीय टिकट विदेशी टिकट संग्रहकर्ताओं को भेजते और उनसे प्राप्त टिकतों के सौ-सौ के पैकेट आठ आठ आने में बेचते।२६ जनवरी १९५० को संविधान सभा लागू होने की खुशी में वडोदरा में डाक टिकट प्रदर्शनी लगी।जगदीश भाई के संग्रह के दो फ्रेम प्रदर्शित हुए और पसन्द किए गए।१५-१६ साल के किशोर के संग्रह से लोग प्रभावित हु। पतों का आदान-प्रदान हुआ और आठ आने पैकेट वाले कई ग्राहक बन गये। स्तैनली गिबन्स का आलबम भी खरीद लिया।
१९५३ में जगदीश भाई ने कई चीजें छोड़ी- जिनमें ऑमलेट के साथ फिल्में देखना भी था।सर्वोदयी गोल में रेडियो के लिए भी माहौल कुछ प्रतिकूल था। १९६३ में विनोबा की पदयात्रा बंगाल में थी। जगदीश भाई २० दिन उसमें शामिल रहे।एक दिन विनोबा की निकट सहयोगी कुसुमताई से मिलने गये तब एक छोटे सेट पर वे फिल्मी गीत सुन रही थीं। जगदीश भाई बल्लियों उछल पद़्ए और उनसे बोले,'यह तो अति उत्तम यन्त्र है।' कुसुमताई ने बताया,'यह 'बाबा' को समाचार सुनाने के लिए आया है।'
मैंने उन्हें रेडियोनामा के बारे में बताया और यह भी कि उनके सर्वोदयी साथी भगवान काका पर मैंने इस चिट्ठे पर एक पोस्ट लिखी थी। इस चिट्ठे के संस्थापक युनुस ख़ान और उनकी पत्नी रेडियो सखी ममता के अहमदाबाद में नूरजहां , शमशाद बेगम और मुबारक बेगम पर केन्द्रित 'ग्रामोफोन क्लब ऑफ़ इण्डिया' द्वारा आयोजित अहमदाबाद में हुए कार्यक्रम के बारे में बताया। जगदीश भाई ने बताया कि वडोदरा के एक यादवजी ऐसा क्लब चलाते।के सी डे के गीत गाने वाले अम्बालाल जो स्वयं प्रज्ञा चक्षु थे इस क्लब के आयोजन में गाते थे। युनुस बताते हैं कि गुजरातियों में पुराने हिन्दी फिल्मी गीतों के संग्रह का शौक व्यापक है।छूटते ही जगदीश भाई कहते हैं-'सूरत के सूरत के हरीश रघुवंशी तो हिन्दी फिल्म संगीत के एन्साइक्लोपीडिया हैं-उनकी गुजराती में एक वृहत पुस्तक भी है"।जगदीश भाई ने भी गुजराती में हिन्दी फिल्मी गीतों की अंत्याक्षरी के लिए राष्ट्री अय्र भक्ति गीतों की एक किताब तैय्यार की है जिसकी २०,००० प्रतियां बिक चुकी हैं।पुस्तक में २०४ गीत हैं तथा इनके पद के शुरुआती वर्ण की विशेष सूची भी दी गयी है। इनमें से १७१ गीतों की एक सीडी भी बनायी है।सर्वोदय जगत के सम्पादक कुमार प्रशान्त के सुझाव पर सर्व सेवा संघ प्रकाशन,राजघाट ,वाराणसी ने हिन्दी संस्करण छापा है।'हिन्दी वाले प्रचार करना नहीं जानते'-जगदीश भाई कष्ट के साथ बताते हैं।
पिछले दस सालों में जगदीश भाई सिर्फ़ यात्रा में रेडियो ले जाते हैम ,बीबीसी सुनने के लिए।पुरानी फिल्मों का उनका संग्रह ४००-५०० सीडी डीवीडी का है।अब के गीतोम के तर्ज ,बोल और नृत्य- जोहराबाई अम्बालेवाली ,सुरैय्या ,कानन देवी,गीता दत्त , लता मगेशकर के इस प्रेमी को नहीं रुचते।

5 comments:

maithily said...

बहुत रोचक संस्मरण है.
हारमोनियम पर रोक के किस्से के लिये कितनी प्रतीक्षा करनी होगी?

सागर नाहर said...

धन्य है.. जगदीश भाई।
आपके पास यादों का बहुत बड़ा खजाना है.. आपसे अनुरोध है कि उसे यूं ही बाँटते रहा करें।
धन्यवाद।

annapurna said...

बहुत अच्छी पोस्ट !

mamta said...

बहुत बढ़िया पोस्ट है ।

हारमोनियम पर रोक के किस्से का इंतजार रहेगा।

आशीष कुमार 'अंशु' said...

बढ़िया पोस्ट

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