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Wednesday, June 11, 2008

टेलीविजन में रेडियो

पिछले रविवार को दोपहर बाद मैं अपनी पसन्द का कोई कार्यक्रम देखने के लिए टेलीविजन के रिमोट पर ऊँगली चला रही थी। एक के बाद एक चैनल आ रहे थे कि एक चैनल पर वालीबाल का मैच चल रहा था और आवाज़ आ रही थी कमल (शर्मा) जी की।


कमल जी टेलीविजन पर वालीबाल की कमेंट्री देते है… ओह ! नो !! यह तो विविध भारती है। फिर हमने देखा वालीबाल का मैच और सुनी बातें साहित्य की, मीडिया की…


मुद्दा ये कि अब रेडियो सुनने के लिए अलग से रेडियो सेट खरीदने की ज़रूरत नहीं। टेलीविजन के ढेर सारे चैनलों में से आपका स्थानीय केबल आँपरेटर एक ऐसे चैनल को जो वहाँ के लोग कम देखते है, उसको एफ़ एम से जोड़ देगा। नतीजा ये कि टेलीविजन चैनल का वीडियो आप देखिए और आवाज़ सुनिए एफ़ एम विविध भारती की।


हमारे घर में कभी ज़ी स्पोर्टस तो कभी फ़ैशन टीवी पर विविध भारती होता है। अक्सर शनिवार रविवार की रात में दस बजे के बाद जब रूटिन धारावाहिक नहीं होते है तब रिमोट कन्ट्रोल से ही काम लिया जाता है और छाया गीत सुना जाता है।

वैसे ही रात के दस बजे सन्नाटा होता है। ऐसे में कभी-कभी छाया गीत में बड़ी गंभीर बातें बताई जाती है और सुनवाए जाते है बड़े ही शान्त और गंभीर गीत जो सन्नाटे को काटते भले लगते है पर नज़र डालो तो तेज़ दौड़ती हुई गाड़ियाँ। कार रेस चल रही है। तेज़ी से सरपट गाड़ियाँ दौड़ रही है और शान्त गीत बज रहा है जिसका धीमा-धीमा संगीत गंभीर बोलों को समेट रहा है।


हद तो तब हो गई जब एक दिन सुबह-सवेरे टेलीविजन पर हामारी नज़र पड़ गई। कमल जी आध्यात्म की बातें बता रहे थे और रैम्प पर बालाएँ अपने जलवे बिखेर रही थी फिर पार्श्व में गूँज उठा भक्ति गीत।

लगता है इस समस्या का शायद ही कोई समाधान हो। क्या ही अच्छा हो कि टेलीविजन में एक चैनल एफ़ एम का हो जिसके पर्दे पर कुछ फूल, पर्वत मालाएँ, हरी-भरी घाटियाँ नज़र आए और सुनाई दे विविध भारती।

2 comments:

mamta said...

अन्नपूर्णा जी दिल्ली मे केबल वाले रेडियो के ३-४ चैनल देते है जिन्हें सुना जा सकता है। जैसे विविध भारती ,एफ.एम.गोल्ड वगैरा।

yunus said...

अन्‍नपूर्णा जी कई सालों से हमारे जबलपुर में केबल वाले फैशन टी वी पर विविध भारती लगा रहे हैं । टी वी पर केवल विविध भारती ही नहीं बल्कि बी बी सी भी होता है । और अगर हम कहें तो दूसरे रेडियो चैनल भी मिल जाएंगे ।
इसका मतलब ये है कि केबल टी वी के ज़माने में भी विविध भारती के प्रसार के रास्‍ते उसके चाहने वालों ने ही खोज निकाले हैं ।

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