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Friday, May 15, 2009

साप्ताहिकी 14-5-09

सुबह 6 बजे समाचार के बाद बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर गौतम बुद्ध के विचार बताए गए। इसके अलावा सप्ताह भर विदेशी चिंतक, स्वामी विवेकानन्द, महात्मा गाँधी के विचार बताए गए, कवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता की पंक्तियाँ बताई गई। वन्दनवार में भगवान बुद्ध के नए भक्ति गीत सुनवाए गए और हर दिन नए पुराने भजन सुनवाए गए। कार्यक्रम का समापन देशगान से होता रहा पर किसी भी दिन विवरण न बताना खटकता रहा।


7 बजे भूले-बिसरे गीत कार्यक्रम इस सप्ताह शनिवार को तलत महमूद की पुण्य स्मृति में समर्पित किया गया। इसी तरह रविवार को अभिनेता, संगीतकार, गायक पंकज मलिक को समर्पित रहा। रविवार के कार्यक्रम के बारे में पहले ही अन्य कार्यक्रमों में संदेश दिया गया था। इस दिन पंकज मलिक के गाए और स्वरबद्ध किए गीत एक के बाद एक सुनवाए गए पर उनके बारे में कुछ बताया नहीं गया। हो सकता है उनके बारे में अधिक जानकारी न हो पर कुछ तो कहा जा सकता था, यहाँ तक कि समाप्ति पर भी यह नहीं बताया कि कार्यक्रम उन्हें समर्पित था। हर दिन कार्यक्रम का समापन के एल (कुन्दनलाल) सहगल के गाए गीतों से होता रहा।

7:30 बजे संगीत सरिता में कांचन (प्रकाश संगीत) जी द्वारा तैयार की गई श्रृंखला - भिण्डी बाज़ार घराने की बंदिशें - जारी रही जिसे प्रस्तुत कर रही है इसी घराने की ख़्यात गायिका डा सुहासिनी कोरटकर। आपसे बात कर रहे है अशोक (सोनावले) जी। इस सप्ताह विभिन्न रागों जैसे शिवरंजनि में बंदिशों की चर्चा की गई। बंदिशों में साहित्य की चर्चा की गई। घराने के नाम के बारे में रोचक बात बताई गई कि अंग्रेज़ इस क्षेत्र को behind the bajar कहते थे जिसे अंग्रेज़ी के कम जानकार भारतीयों ने भिण्डी बाज़ार बना दिया। ख़्यात कलाकारों जैसे अमान अलि खाँ की और उनकि शिष्यों की बंदिशें भी सुनवाई गई। फ़िल्मी गीत भी इन रागों पर आधारित सुनवाए गए।

7:45 को त्रिवेणी में ज़िन्दगी की मंज़िल और रास्तों की बात हुई, छुट्टियों की चर्चा हुई। ज़िन्दगी में सुख-दुःख और दूसरों के जीवन में ख़ुशी की लहर लाने की बात हुई। सभी आलेख अच्छे थे। गीत कहीं-कहीं खटकने लगे जैसे गुरूवार को बताया गया कि अच्छे-बुरे सभी गुण होते है , पर अपनी बुराइयों पर ध्यान नहीं दिया जाता, इस तरह अच्छी बातें बता कर रफ़ी साहब का यह गीत सुनवाया गया -

किसी ने कहा है मेरे दोस्तों

बुरा मत कहो बुरा मत देखो बुरा मत सुनो


इसके बाद गौतम बुद्ध की संक्षिप्त कथा बताई गई कि एक बार किसी ने उनसे अपशब्द कहे लेकिन वो चुप रहे जब इसका कारण पूछा गया तो उन्होनें बताया कि जो कहा गया उसे उन्होनें ग्रहण नहीं किया। बहुत ऊँची बात कह दी गई कि अपने मन में प्रेमभावना होनी है और करना वही है जो अपना दिल कहता है और सुनवाया गया यह गीत और गीत शुरू होते ही त्रिवेणी का और आलेख का स्तर नीचे आ गया, गीत है -


सुन ले तू दिल की सदा


अरे भई यह दिल की सदा नायक सुना रहा है नायिका को जो रोमांटिक प्यार है जबकि बुद्ध द्वारा जिस प्यार की चर्चा हुई वो एक मनुष्य का दूसरे मनुष्य के प्रति प्रेम है। प्यार के अलग-अलग रूप है, इस तरह ऊँचे स्तर पर जाकर ऐसे रोमांटिक गीतों का चुनाव ठीक नहीं लगता है। वैसे त्रिवेणी में अक्सर गीतों के चुनाव में ग़लतियाँ देखी गई।



दोपहर 12 बजे एस एम एस के बहाने वी बी एस के तराने कार्यक्रम में शुक्रवार को क़ुर्बानी, धर्मात्मा, मिशन काश्मीर जैसी नई पुरानी फ़िल्में लेकर आई सलमा जी। सोमवार को मैनें प्यार किया, अकेले हम अकेले तुम जैसी लोकप्रिय फ़िल्में लेकर आए युनूस जी। मंगलवार को निम्मी (मिश्रा) जी लाईं लोकप्रिय फ़िल्में - खेल खेल में, सौदागर, अमर अकबर एन्थोनी, तेरे मेरे सपने। बुधवार को अजेन्द्र (जोशी) जी ले आए कभी ख़ुश कभी ग़म, मैं हूँ ना, अजनबी जैसी नई फ़िल्में। गुरूवार को कमल (शर्मा) जी लाए नाइट इन लंदन, शागिर्द, हमसाया जैसी लोकप्रिय फ़िल्में। हर दिन श्रोताओं ने भी इन फ़िल्मों के लोकप्रिय गीतों के लिए संदेश भेजें।

1:00 बजे शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम अनुरंजनि में गायन प्रस्तुति में शुक्रवार को पंडित कुमार गंधर्व का गायन - राग तोड़ी और सहेली तोड़ी में सुनवाया गया। गुरूवार को विदूषी शोभा गुर्टू का उप शास्त्रीय गायन सुनवाया गया जिसमें मिश्र तेलंग ठुमरी, राग मांज खमाज और राग सिन्धु काफ़ी में रचनाएँ सुनवाई गई।

वादन प्रस्तुति में सोमवार को पंडित वी जी जोग का वायलन वादन सुनवाया गया - राग अहीर भैरव। मंगलवार को बनारस घराने के प्रख्यात तबला वादक पंडित किशन महाराज का तबला वादन - तीन ताल में और अप्पा जलगाँवकर का हारमोनियम वादन प्रस्तुत हुआ। बुधवार को विदूषी एम राजम से वायलन पर काफ़ी ठुमरी, बुद्धादित्य मुखर्जी से सितार पर राग देस, शिवकुमार शर्मा से संतूर पर राग मिश्र भैरवी तथा पंडित कार्तिक कुमार और निलाद्री कुमार से राग सिन्धु भैरवी में सितार और सुरबहार पर जुगलबन्दी सुनवाई गई।

इस तरह सप्ताह भर गायन के साथ विभिन्न वाद्यों का आनन्द मिला।

1:30 बजे मन चाहे गीत कार्यक्रम में श्रोताओं ने मिले-जुले गीतों के लिए फ़रमाइश की जैसे साठ के दशक की फ़िल्म पत्थर के सनम का शीर्षक गीत। नई फिल्म ख़ूबसूरत का कविता कृष्णमूर्ति और कुमार सानू का गाया यह गीत -

मेरा एक सपना है के देखूँ तुझे सपनों में
तू माने या न माने के तू है मेरे अपनों में


पुरानी फ़िल्म दिल और अपना प्रीत पराई का लता जी का गाया यह गीत -

अजीब दास्ताँ है ये कहाँ शुरू कहाँ ख़तम
ये मंजिलें है कौन सी न वो समझ सके न हम

3 बजे सखि सहेली कार्यक्रम में शुक्रवार को हैलो सहेली कार्यक्रम में फोन पर सखियों से बातचीत की रेणु (बंसल) जी ने। पहला फोनकाल बिहार के एक पिछड़े गाँव से आया, छात्रा थी, बताया कि गाँव में बिजली नहीं है, आगे की पढाई की सुविधा नहीं है पर वहाँ से मुंबई - विविध भारती तक फोन करने की सुविधा है, बड़ा अजीब लगा यह जानकर कि कैसी-कैसी सुविधाएँ है और कैसी-कैसी नहीं है। अधिकतर छात्राओं ने बात की। एकाध घरेलु सखियों से भी बातचीत हुई। उत्तरप्रदेश से अधिक सखियों ने बात की। नए गाने कुछ अधिक ही पसन्द किए गए जैसे -

तुम्हें देखें मेरी आँखें इसमें क्या मेरी ख़ता है

सोमवार को रविवार को मनाए गए मदर्स डे की चर्चा की गई और तलाश फ़िल्म का एस डी बर्मन का गाया यह गीत सखि सहेली की ओर से सबको समर्पित किया गया, बहुत अच्छा लगा -

मेरी दुनिया है माँ तेरी आँचल में

सखियों के भेजे गए कुछ व्यंजन बताए गए जिसमें सबसे अच्छा लगा छत्तीसगढ का पारम्परिक व्यंजन जो चावल और छाँछ से बनाया जाता है। मंगलवार को करिअर संबंधी बातें बताई जाती है। इस बार इंटिरियर डिज़ाइनिंग यानि आंतरिक सज्जा के क्षेत्र की बातें बतायी गई। बुधवार को सौन्दर्य और स्वास्थ्य पर चर्चा में सखियों के भेजे पुराने नुस्क़े ही बताए गए। सखियों की पसन्द पर सप्ताह भर नए पुराने और बीच के समय के अच्छे गीत सुनवाए गए जैसे नई फ़िल्म दिल्ली 6 का यह गीत -

मटककली मटककली
मटक मटक ज़रा पंख झटक

और अस्सी के दशक की फ़िल्म थोड़ी सी बेवफ़ाई का यह गीत -

मौसम मौसम लवली मौसम
कसक अन्जानी है मद्धम मद्धम
चलो घुल जाए मौसम में हम
मौसम मौसम लवली मौसम

पिटारा में शाम 4 बजे रविवार को यूथ एक्सप्रेस में रेड क्रास दिवस और रविन्द्रनाथ टैगोर की जन्मतिथि पर विशेष बातें बताई गई। गीतकार प्रेम धवन को याद किया गया। विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश की सूचना दी गई।

शुक्रवार को प्रस्तुत किया गया कार्यक्रम बाईस्कोप की बातें जिसमें फ़िल्म नया दौर की बातें बताई गई। हमेशा की तरह इस बार भी लोकेन्द्र शर्मा जी ने बहुत अच्छी तरह से हर बात बताई। सोमवार को सेहतनामा कार्यक्रम में डा शरद साठे से राजेन्द्र (त्रिपाठी) जी ने किडनी रोग पर बातचीत की। बहुत अच्छी जानकारी मिली कि अक्सर गुर्दे (किडनी) का रोग 50% तक फैलने तक पता नहीं चलता। माँसाहार से रोग का ख़तरा बढता है। बुधवार को आज के मेहमान कार्यक्रम में गायक कुमार सानू से बातचीत सुनवाई गई, आरंभ में गानों के अंश सुनवाने के बाद कमल (शर्मा) जी ने ठीक कहा कि एक गायक की एक गीतकार से बातचीत अधिक ठीक रहती है, इस तरह कुमार सानू से बातचीत की गीतकार राजेश जौहरी ने। शनिवार, मंगलवार और गुरूवार को हैलो फ़रमाइश में श्रोताओं से फोन पर बातचीत हुई और उनकी पसन्द के गीत सुनवाए गए।

5 बजे समाचारों के पाँच मिनट के बुलेटिन के बाद सप्ताह भर फ़िल्मी हंगामा कार्यक्रम में नई फ़िल्मों के गीत सुनवाए गए।

7 बजे जयमाला में हर दिन नए पुराने गीत सुनवाए गए जैसे नई फ़िल्म कृष का गीत और सत्तर के दशक की लोकप्रिय फ़िल्म कच्चे धागे का लता जी का गाया यह लोकप्रिय गीत जिसकी फ़रमाइश फ़ौजी भाइयों ने बहुत-बहुत दिन बाद की -

हाय हाय एक लड़का मुझको ख़त लिखता है
लिखता है हाय मुफ़्त में ले ले तू मेरा दिल बिकता है

शनिवार को विशेष जयमाला प्रस्तुत किया अभिनेत्री शर्मिला टैगोर ने। बहुत अच्छा लगा सुनकर। अधिकतर ख़ुद की फ़िल्मों के गीत सुनवाए। साथी कलाकारों की प्रशंसा की जैसे संजीव कुमार और कुमकुम।

7:45 पर शुक्रवार को पूर्वी, असमी लोकगीतों का आनन्द लिया, भूपेन हज़ारिका को सुनने के बाद दूसरे गीत कुछ फीके लगे। शनिवार और सोमवार को पत्रावली में निम्मी (मिश्रा) जी और महेन्द्र मोदी जी आए। इस बार भी कुछ कार्यक्रमों की तारीफ़ तो कुछ पुराने कार्यक्रमों को फिर से शुरू करने का अनुरोध था। कार्यक्रमों में परिवर्तन की सूचना देते हुए बताया गया कि फ़िल्मी भजनों का कार्यक्रम सांध्य गीत शाम 6:15 बजे से प्रसारित हो रहा है। इस बारे में हम बता दे कि हैदराबाद में प्रसारित नहीं हो रहा। यहाँ 5:30 बजे फ़िल्मी हंगामा के बाद क्षेत्रीय प्रसारण शुरू हो जाता है फिर शाम 7 बजे ही हम केन्द्रीय सेवा से जुड़ते है। मंगलवार को सुनवाई गई ग़ैर फ़िल्मी क़व्वालियाँ। बुधवार को फैशन फोटोग्राफ़र और माडल कोआडिनेटर मोहित इसरानी से रेणु (बंसल) जी की बातचीत सुनवाई गई। बताया कि पारिवारिक माहौल से ही वह इस क्षेत्र में आए। इस नए काम के बारे में जानना अच्छा लगा। बातचीत अच्छी लगी। रविवार और गुरूवार को राग-अनुराग में विभिन्न रागों पर आधारित फ़िल्मी गीत सुने जैसे राग पहाड़ी पर आधारित नूरी फ़िल्म का ख़ैय्याम का स्वरद्ध किया यह गीत -

चोरी चोरी कोई

8 बजे हवामहल में सुनी झलकी - शादी की तैयारी (निर्देशिका लता गुप्ता), हास्य नाटिका - एक लड़का कुँवारा (निर्देशक महेन्द्र मोदी), ड्रामा ड्रामा (रचना इब्राहिम अश्क निर्देशक गंगाप्रसाद माथुर)

9 बजे गुलदस्ता में गीत और ग़ज़लें सुनवाई गई।

9:30 बजे एक ही फ़िल्म से कार्यक्रम में जो जीता वही सिकन्दर, आशा जैसी लोकप्रिय फ़िल्मों के गीत सुनवाए गए और सबसे अच्छा लगा विश्वास फ़िल्म के गीतों को बहुत-बहुत समय बाद सुनना जिसमें मुकेश की आवाज़ के विविध रंग है और शायद मनहर ने पहली बार गाया है। एक से बढ कर एक गीत -
ढोल बजा ढोल ढोल जानियाँ

आपसे हमको बिछड़े हुए एक ज़माना बीत गया

ले चल ले चल मेरे जीवन साथी
ले चल मुझे उस दुनिया में प्यार ही प्यार है जहाँ

चाँदी की दीवार न तोड़ी प्यार भरा दिल तोड़ दिया

रविवार को उजाले उनकी यादों के कार्यक्रम में गीतकार नक्शलायल पुरी से कमल (शर्मा) जी की बातचीत की अगली कड़ी प्रसारित हुई।

10 बजे छाया गीत के नाम पर इस बार भी निम्मी (मिश्रा) जी भूले बिसरे गीत ले आईं, बात कही दिल के तार पर नए गीत छेड़ने की और सुना दिया पुराना गीत। राजेन्द्र (त्रिपाठी) जी ने भी पहले की तरह नए गीत ही सुनवाए। रेणु (बंसल) जी ऐसे गीत लेकर आईं जिनमें दर्द तो है पर वे दिल को सुकून देते है।

10:30 बजे से श्रोताओं की फ़रमाइश पर गाने सुनवाए गए जिनमें बीच के समय की फ़िल्मों के गीतों की अधिक फ़रमाइश थी। 11 बजे समाचार के बाद प्रसारण समाप्त होता रहा।

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