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Thursday, May 28, 2009

शहनाई के रंग- फिल्मी गीतों के संग

पत्नी की छुट्टियां इस बार मेरे लिये कम से कम एक मामले में सुखद सी रही, रो सुबह वन्दनवार, भूले बिसरे गीत, संगीत सरिता और त्रिवेणी पिछली सात मई से रोजाना सुन पाता हूं, खाना बनाते बनाते :) यह अलग बात है कि खाना बनाना मेरे लिये कितना दुखद रहता है

खैर..

पिछले बारह दिनों से चल रही इस सीरीज की ग्यारहवी कड़ी के साथ इस सुन्दर कार्यक्रम का आज समापन हो गया। ( आप सोच रहे होंगे कि बारह दिनों में ग्यारह कड़ी कैसे? तो यहां बताना चाहूंगा कि दसवीं कड़ी दो बार प्रसारित हो गई थी) आमंत्रित कलाकार कृष्णा राम जी चौधरी मेरे प्रिय संगीतकार और शहनाई नवाज राम लाल जी के भतीजे हैं जानकर एक सुखद आश्चर्य हुआ। रामलाल जी को जवाहरात पहनने का बहुत शौक था इसलिये फिल्म जगत में उन्हें रामलाल हीरापन्ना के नाम से भी जाना जाता था। कार्यक्रम की एंकर कांचन प्रकाश संगीत का संगीत ज्ञान भी इस कार्यक्रम से पता चला, कि कैसे फटाफट वे रागों को पहचान जाती है।

पता नहीं क्यों इस कार्यक्रम को सुनने के बाद लगता है कि अभी इस में बहुत सी कड़ियां और आ सकती थी, अन्तिम दो दिन तो बहुत जल्दी बीत गये। देखते हैं विविध भारती कल कौनसा नया कार्यक्रम लेकर आती है।
:)

4 comments:

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

सागर भाइ'स्सा ..
इत्तीफाकन मैँने भी
शहनाई के सुरोँवाली पोस्ट लगायी है अवश्य देखियेगा -
- लावण्या

Udan Tashtari said...

सही है..सुनिये रेडियो-खाना अच्छा बनेगा!! :)

annapurna said...

बहुत दिन बाद आपका चिट्ठा यहाँ पढना अच्छा लगा।
मसालों के एक विज्ञापन में फ़रीदा जलाल कहती है - खाना बनाते-बनाते गाना गाने का आयडिया बुरा नहीं है, ख़ैर…
अब शुरूवात हो ही चुकी है तो क्यों न सुबह के प्रसारण की साप्ताहिक समीक्षा आप लिखें, कुछ ही सही, स्वाद तो बदलेगा…

PIYUSH MEHTA-SURAT said...

श्री सागरभाई,
ख़ुशी हुई । पढ़ कर आपकी त्र्डियो कार्यक्रमो के बारेमें पोस्ट । जैसा अन्नपूर्णाजीने कहा जारी रख़ीये । यह श्रृंखला मैंनें भी सुनी है । आप को लगेगा की यह रेडियो श्री लंका छॉड कर विविध भारती कैसे आया तो बता दूँ, की पिछले दो दिनो को छॉड कर कुछ दिनों से रेडियो श्री लंका इतना वीक था कि गानो की थोडी सी आवाझ और उद्दघोषीका की बिलकुल मंद आवाझों से कई गुना ज्यादा डिस्टोर्सन वाली आवाझ आती थी । तो अन्य रेडियो सेट पर विविध भारती तो लगाते ही है ।
आपको एक ही दिनमें चार टिपणीयाँ मिली तो लगता है कि आपकी लिख़ाई का लोगों को इंतझार रहता है ।
अगर आप नियमीत रूपसे लिख़ेंगे तो इस ब्लोग के नियमीत पाठक गण बढ़ेंगे तो हम लोगो की पोस्ट भी पढ़ी जायेगी ।
हाँ एक और प्रकारके टिपणीकर्ता भी है । जो पोस्ट के बारेमें कुछ नही लिख़ते पर अपने निज़ी ब्लोग की और लोगो को ख़ींचना काहते है ।
पियुष महेता -नानपूरा-सुरत

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