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Saturday, October 13, 2007

१३ अक्तूबर हरफ़नमौला अमर गायक स्व. किशोर कूमार

नीचे दिया हुआ कोमेन्ट मैनें रेडियोवाणी के लिये अगस्त २००७ में लिखा था । आज थोडे समय अभावके कारण उस टिपणीमें किशोरदा के कुछ १९७० यानि फिल्म आराधना के पहेले के उनके गाये कुछ मेरी पसंद के पर बहोत ही कम रेडियो पर सुनाई पड़ते गानोको याद किया है । उस समय हिन्दी की बोर्ड का इस्तेमाल पता नहीं था, इस लिये इन्ग्रेजी भाषा का उपयोग किया है, तो पाठक गण मूझे क्षमा करेंगे ऐसी प्रार्थना है ।
We are thankful to late Shri Sachindeo Burman sahab, Shri Khemchand Prakashji, Shri Devanandji Shri Rajesh Khannaji and Off cource Late Shri Anil Viswashji for giving us Shri Kishor Kumarji. We can't forgate Pair off shri Kalyanji-Anandji. C Ramchandji and Late Shri Rahulbeo Burmanji for Kishorji. I also had listen Ameen Sayani saheb's talk with Kishorda tributing to Shri S. D Burmanji after very few days of Burmanda's death.
I would like to remember Laherose Pooch loo-(KAFILA), To hai Chanda to mai hun Chakor (Ziddi-Khemchand Prakashji), Tere jahan se chal Diye-(Rukshana-Sajjad Husain), Mere Sukh Dookhka sansar tere Do Nainanme-(FAREB-Anil Viswasji) and off cource Aa mohobat ki Basti-Fareb-Anil Viswas which is nowaday very well known song). Dil Dilse Milakar Dekho- MEMSAHIB (Madan Mohan), Hal Tuze Apni Dunia Ka(ASHA-C. Ramchandji). Chup Hoja ameeron ki ye sone ki ghadi hai-BANDI (Music-Hemant Kumar ?), Moona bada pyara-MUSAPHIR9SALIL CHOUDHRY)

दि. १३-१०-२००५ के दिन केन्द्रीय विविध भारती सेवा के हल्लो फरमाईश कार्यक्रम अंतर्गत श्री रेणू बंसलजीने किशोरदा के बारेमें श्रोताओं के साथ की गयी अपनी बात चीत के संपादित अंश और श्रोताओं की पसंदके किशोरदा के गाये गीतों को प्रस्तूत किया था । उन श्रोताओं में से एक मैं भी था । जिसमें उनके कहने पर स्व. मदन मोहन साहब के संगीतमें श्री देव आनंदजी के लिये गाये गीत दिल दिल से मिला कर देखो (फिल्म : मेम साहब) मैने माउथ ओरगन पर बजाई थी । उसका शुरूका अंश गाने के शुरू के अंश (जिसमें गाने की प्रथम पंक्ती को सिटी पर बजाया गया है )के स्थान पर जोड़ कर प्रस्तूत किया गया था ।

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5 comments:

सजीव सारथी said...

किशोर दा को कोटी कोटी नमन

Manish said...

पियूष मेहता जी किशोर कुमार पर इस श्रृद्धांजलि के लिए धन्यवाद. अभी हाल ही मैंने नौ भागों मे उनकी जिंदगी के विविध पहलुओं पर चर्चा की थी। समय मिले तो देखिएगा और अपने विचार दीजिएगा।

http://ek-shaam-mere-naam.blogspot.com/2007/08/blog-post_12.html

PIYUSH MEHTA-SURAT said...

श्री मनीषजी,
आपकी यह पूरी चर्चा मैनें हाल हीमें करीब तीन या चार दिन पहेले ही पढी़ है और वह भी एक सांसमे ही पूरे ९ भाग पर उस पर टिपणी देनेमें तो और पाठको की तुलनामें बहोत ही पिछे होता इस लिये नहीं दी । पर मेरा एक हेतु साफ़ है कि जो फिल्म संगीत का स्वर्ण काल कहा जाता है उस समय भी किषोरदा के गाये गाने बहोत सुंदर ही थे । इस लिये उन गानों को मैने ज्यादा याद किया है । मैं यह कभी नहीं मानता हूँ कि किशोरदा और रफी साहब के गाये हुए संयूक्त या अलग अलग गाये हुए एक ही गानोमें किशोर्दा की गायकी रफी़ साहब से निम्न रही हो । जैसे (९)है बाबू-फ़िल्म: भागम बाग (२) चल शुरू हो जा-फिल्म : हमजोली (३) बच्चे में है भगवान-फिल्म : नन्हा फरिस्ता ९४० (४)तूम बिन जाऊँ कहाँ -पिल्म: प्यार का मौसम

आपने इस पोस्ट्में जूडी रेकोर्डिंग सुनी ही होगी गिसमें भी मैने साफ़ कहा है कि लोगोने भले ही उनको फिल्म आराधना के बाद चाहा पर मैं उनका और तलत साहबका पहेले से ही चाहक रहा हूँ । अगर फिल्म शरारत और रागिणी के उनके अभिनीत गाने अगर रफी साहब की जगह उनको ही दिये जाते तो वे भी इसी तरह अच्छे और लोग चहीते बनते ही बनते । क्यों कि अनिलदा का सगीत बद्ध किया गाना आ मोहोबत की बस्ती (फिल्म : फरेब) कम मुश्कील गाना नहीं है जो उनकी शुरूआती केरियर का है ।
पियुष

Manish said...

पियूष जी हमलोगों की पैदाइश ही सत्तर के दशक की है इसलिए किशोर के पचास के दशक के गुमनाम गीतों की जानकारी आप जैसे संगीतप्रेमियों से ही मिल पाती है। इस जानकारी का धन्यवाद..

Anonymous said...

अच्छा लगा पढ कर और सुन कर

अन्नपूर्णा

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