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Monday, October 1, 2007

अंताक्षरी सबसे पहले विविध भारती से ?

आज अंताक्षरी टेलीविजन चैनलों का एक लोकप्रिय कार्यक्रम बन गया है। जहां तक मेरी जानकारी है अंताक्षरी कार्यक्रम सबसे पहले विविध भारती से प्रसारित हुआ था।

यह सत्तर के दशक का समय था। वर्ष शायद 1975 या 76 या 77 हवामहल के बाद रात साढे नौ बजे प्रायोजित कार्यक्रम में अंताक्षरी होती थी जिसे प्रस्तुत करते थे शील कुमार।

पता नहीं कितनों को याद है प्रसारण जगत का यह नाम - शील कुमार जो रेडियो और दूरदर्शन पर कार्यक्रमों का संचालन करते थे।

अंताक्षरी कार्यक्रम कुल 15 मिनट का होता था। इसमें एक ही राउंड होता था अंताक्षरी राऊंड यानी एक अक्षर से गीत शुरू करना और उसके अंतिम अक्षर से अगला गीत।

यहां टीम नहीं थी। केवल दो कलाकार ही अंताक्षरी खेलते थे। इन दो कलाकारों में लड़का और एक लड़की होते थे। किसी अक्षर से गीत नहीं गा सकने पर हार जाते लेकिन दूसरा कलाकार भी नहीं गा पाता तो संचालन करने वाले शील कुमार एक नया अक्षर दे देतें। समय की समाप्ति पर दोनों बराबर होते तो दोनों को बराबर मान कर खेल समाप्त कर दिया जाता।

यह कार्यक्रम साप्ताहिक था। हर सप्ताह एक शहर के कलाकर आते। कार्यक्रम की रिकार्डिंग भी विभिन्न शहरों में हुई थी। हैदराबाद में भी हुई।

शील कुमार किसी एक शहर में जाते। विज्ञापन कैसे दिया जाता ये तो पता नहीं पर उस शहर के कलाकार जिनमें कालेज और विश्व विद्यालय के लड़के - लड़कियां भी शामिल होते, शील कुमार से संपर्क करते। फिर उनका आडिशन होता और केवल एक लड़का और लड़की चुने जाते। यही दोनों अंताक्षरी खेलते।

उन दिनों पता नहीं किस शहर से एक लड़के ने भाग लिया था जिसका नाम किशोर कुमार था। नाम असली था नकली ये तो पता नहीं चला लेकिन उसकी आवाज़ भी बहुत अच्छी थी और सुर भी सधा हुआ था। उसे जूनियर किशोर कुमार कहा जाने लगा था। उस दौर के अख़बारों में भी उस पर कुछ लेख लिखे गए। जैसा कि अक्सर होता है कुछ लोगों द्वारा कलाकारों को सब्ज़ बाग़ दिखाए गए।

कार्यक्रम लंबे समय तक नहीं चला। याद नहीं इस कार्यक्रम को कौन सा उत्पाद बनाने वाली कंपनी ने प्रायोजित किया था। कार्यक्रम का नाम भी मुझे ठीक से याद नहीं शायद अंताक्षरी या शील कुमार की अंताक्षरी या उस उत्पाद की अंताक्षरी था।

7 comments:

PIYUSH MEHTA-SURAT said...

अन्नपूर्णाजी,

यह कार्यक्रम मूझे भी याद है । हमारे यहाँ सुरतमें हम लोग विज्ञापन प्रसारण सेवा मुम्बई से सुनते थे । वैसे वह कार्यक्रम स्यानिक पर हकीकतमें क्षेत्रीय रूपसे प्रायोजित किया जाता था । पर हर केन्द्रों के लिये कार्यक्रम एक ही रहता था और शायद कार्यक्रम की बूकिंग शायद हर राज्यो के लिये एक समय के लिये या अलग अलग समय के लिये भी हो सकती थी । इस कार्यक्रमको शुरूमें क्यूटिक्यूरा टेल्कम पाउडर बनानेवाली कम्पनी म्यूलर अन्द पिप्स (इन्डिया) लि. और बादमें साडियों के उत्पादक बी. के. इन्डस्ट्रीझ प्रयोजित करती थी । पर बी. के. इन्डस्ट्रीझ द्वारा उसी वर्षोमें एक और कार्यक्रम रेडियो श्रीलंका से भी प्रयोजित होता था, जिसका नाम मेहमूद के मुहसे था और वह श्री अमीन सायानी साहब प्रस्तूत करते थे । कुछ समय बाद मेह्मूद साहब उस कार्यक्रमसे निकल गये थे और अमीन सायानी साहब के साथ एक महिला प्रस्तूत-कर्ता जूडी थी और उनका नाम आयशाजी था।

पियुष महेता
सुरत-३९५००१.

yunus said...

लगता है कि ये बहुत पुराने ज़माने की बात है । शील कुमार जी वो आवाज़ हैं जिनसे विविध भारती का आग़ाज़ हुआ था ।

mamta said...

अन्नपूर्णा जी कितने पुराने समय में आप ले गयी। पर उस समय भी अन्ताक्षरी का क्रेज लोगों मे बहुत था।

Manish said...

मुझे ऍसे ही एक कार्यक्रम की याद पड़ती है जो अस्सी के दशक के प्रारंभ में रविवार के दिन आता था और न्यूट्रीन चॉकलेट इसे प्रायोजित करती थी।

PIYUSH MEHTA-SURAT said...

श्री युनूसजी और श्री अन्नपूर्णाजी,
जैसे आपमें से युनूसजीने कहा, उसमें एक छोटा संशोधन करता हूँ, कि शील कूमारजी रेडियो विज्ञापन के क्षेत्रमें आकाशवाणीने विविध भारती की विज्ञापन प्रसारण शुरू की, ज्नके कई साल पहेले से रेडियो श्री लंका से प्रसारित होने वाले विज्ञापन और प्रायोजीत कार्यक्रमों में स्व. श्री बाल गोविंद श्रीवास्तव और श्रीमती कमल बारोटजी (जो जानी मानी गायिका भी है ) के साथ अपनी आवाझ देते थे । पर जैसे ही १९६७में विविध भारती की विज्ञापन प्रसारण शुरू हुई, इन तीनोंने रेडियो श्री लंका के भारत स्थित प्रतिनिधी रेडियो एडवर्टाईझींग सर्विसीझ से अपना नाता तोड कर अपनी निजी कम्पनीयाँ बनाई थी, जिसमें बाल गोविंद श्रीवास्तवजी और कमलजी ने साथ साथ काम किया सुर शील कुमारजीने अपनी अलग कम्पनी बनाई । विविध भारती की विज्ञापन प्रसारण सेवा के रजत जयंती के अवसर पर श्री अमीन सायानी साहबने यादों का कारवा नामक ७५ मिनीटका कार्यक्रम १९९२में सिर्फ़ विज्ञापन सेवा के केन्द्रो के लिये बनाया था, जो हाल ही में विविध भारती के स्वर्ण जयंती के अवसर पर १४, २१ और २८ ऐप्रील को तीन किस्तोमें श्रीमती कांचन प्रकाश संगीतजी ने पुन: प्रस्तूत किया था, उसमें शील कूमारजी की पुरानी ध्वनि मूद्री के साथ उनके बेटे स्वदेशजीने ऐसी बात बताई थी, कि ’ये विविध भारती की विज्ञापन प्रसारण सेवा है ।’ ऐसी उद्दधोषणा सर्व प्रथम शील कूमारजी ने की थी ऐसा बताया था । पर अगर ऐसा हुआ भी होगा तो वे अतिथी उद्दघोषक के रूपमें होगे, क्यों की मेरे ख़यालसे उस जमाने में अस्थायी उद्दधोषक नहीं रखे जाते थे । इसी २८ ऐप्रील को बाकी समयमें कांचनजी ने मेरे साथ और भोपाल के श्री गोविंद मालवियाजी के साथ हुई अपनी टेलिफोनिक बात-चीत को प्रस्तूत किया था, ’यादों का कारवा’ की ध्वनि-मूद्री श्री अमीन सायानी साहब और श्री मनोहर महाजनजी के कहने पर मैनें ज्नको भेजी थी ।

पियुष महेता
सुरत-३९५००१.

Anonymous said...

पीयूष मेहता जी जानकारी के लिए बहुत - बहुत धन्यवाद ।

यूनुस जी, मनीष जी, और ममता जी मेरे चिट्ठे पर आने का शुक्रिया।

अन्नपूर्णा

vinodsirohi said...

शील कुमार का प्यार भरा नमस्कार , अब शुरू होती है क्यूटी कुरा अन्ताक्षरी (बचपन में यही समझ में आता था ) | अन्ताक्षरी के मंच पर सबसे पहले जो आरहे हैं कलाकार ......ये हैं दिल्ली से पवन कुमार , जी हाँ पवन जी आप क्या करते हैं .... और इनके सामने हैं ...मुम्बई की कलाकार ......फिर कुछ दिन कोलगेट अन्ताक्षरी भी चली |

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