क्या ये गूंगे का गुड़ है या भूखे की रोटी? क्या ये अनंत आसमान है या अ-आयामी ब्लैक होल?
कविसम्मेलन तीन घंटे चला, जिसकी एक-एक घंटे की रेकॉर्डिंग (प्रत्येक कोई 7 मेगाबाइट एमपी3 मात्र.) आपके लिए नीचे लाइफ़लॉगर प्लेयर की कड़ी के रूप में दी जा रही है. पर, अच्छा ये होगा कि आप इन्हें डाउनलोड कर रखें, और फुरसत के समय सुनें-सुनाएं. आपके मोबाइल एमपी3 प्लेयर के लिए भी यह शानदार संग्रह होगा - किसी लंबी बोरियत भरी यात्रा में इसे चालू कर लें, प्यार के सागर में गोते खाते आपका सफर कैसे कटेगा आपको यकीनन पता ही नहीं चलेगा.
प्यार की बातें प्यार के गीत भाग 1
प्लेयर पर सीधे बजाएं:
6 comments:
भाई हम लोगों का ये वक़्त तो आफिस में निकल जाता है। अब आपके लिंक की बदौलत डाउनलोड कर फुर्सत से सुनेंगे। बहुत बहुत शुक्रिया आपका।
रवि भाई आपको एक बार फिर नमन है । इसलिए तो हम आपको रवि गुरू कहते हैं । आपकी तत्परता वाकई काबिले नमन है सरकार ।
सुन रहे हैं और बहुत मजा आ रहा है.. धन्यवाद रवि भाई सा.
टिप्पणी करेने के इस जुगाड का अलग ही मजा है.. सुनते हुए ही टिप्पणी कर दी और पेज भी नहीं बदला। :)
बिना रुके तीसरा और अंतिम हिस्सा अभी पूरा किया, रोज दोपहर को सुस्ती आ जाती है दस पन्द्रह मिनिट की जपकी भी लगा लेते हैं पर आज इस कार्यक्रम को सुनता रहा।
बहुत बढ़िया लगा।
बहुत अच्छी पेशकश.
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आपकी टिप्पणी के लिये धन्यवाद।