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Thursday, April 24, 2008

कला और सैन्य शक्ति का संगम

कल रात जयमाला के बाद हमेशा की तरह बुधवार को प्रसारित होने वाला साप्ताहिक कार्यक्रम इनसे मिलिए सुना। सीमा सुरक्षा बल के डिप्टी कमान्डेंट आर एन राय से भेंट वार्ता की अशोक (सोनावले) जी ने।

सहज स्वाभाविक बातचीत थी। सेना में आने का इरादा और भर्ती से लेकर बातचीत में व्यक्तिगत जीवन की भी झलकियाँ मिली। इससे एक संगम की झलक मिली - कला और सैन्य शक्ति का संगम।

आखिर बंगाल है ही रविन्द्रनाथ टैगोर और सुभाष चन्द्र बोस की भूमि। एक ओर कला तो दूसरी ओर सेना पर दोनों के मूल में है देश भक्ति। आज भी सेना में यह देखने को मिलता है।

राय साहब ने सेना के बैंड और धुनों के बारे में भी बताया कि कैसे अभ्यास किए जाते है। कैसे यह सब उनके कार्यक्रमों का एक हिस्सा होते है।

राय साहब ने बताया कि उनके पिता संगीत से जुड़े थे। फिर उन्होनें बताया कि कैसे उनकी नौकरी में विविध भारती उनका साथी रहा। अशोक जी ने जयमाला के बारे में भी बात की। किसी फ़ौजी से जयमाला के बारे में बहुत ही कम सुनने को मिलता है वरना फ़िल्म वाले ही इस बारे में बात करते है।

सीमा सुरक्षा से संबंधित काम की भी उन्होनें जानकारी दी। प्रशिक्षण के बारे में बताया। कुल मिलाकर बातचीत सभी पहलुओं को छूती हुई श्रोताओं को कुछ अधिक जानकार बना गई।

मैनें इस कार्यक्रम में पहली बार किसी फ़ौजी अफ़सर से बातचीत सुनी। लगता है विविध भारती की टीम द्वारा की गई जैसलमेर की यात्रा का यह एक अंश है। क्या वहाँ विशेष जयमाला की भी रिकार्डिग की गई ? क्या कमल (शर्मा) जी ने फ़ौजी भाइयों के जयमाला संदेश भी रिकार्ड किए ? क्या आने वाले दिनों में यह सब हम सुन पाएगें ?

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