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Thursday, February 7, 2008

रेडियो सिलोन

आदरणिय श्रीमती अन्नपूर्णाजी,
आज आपने रेडियो सिलोन की चर्चा फिर एक बार छेडी है तो उस बारेमें आपसे कहना चाहता हूँ, कि आज मैनें एक बार फिर रेडियो श्रीलंका के फोन इन कार्यक्रममें भाग लिया और उस कार्यक्रममें रेडियो श्रीलंकाके मेरे कुछ पूराने पर मेरे परिचयमें अभी अभी ही आने वाले श्रोताओं के नामों के साथ आप का जिक्र एक बार फिर किया, एक पूरानी पर नयी श्रोता और इस ब्लोग लेखिका के रूपमें रेडियो सिलोन के चाहक के रूपमें । वैसे मेरी पूरानी रेकोर्डिंग को कोनसा नाम दिया है वह याद नहीं आ पाने की वजहसे ही आज आपकेर नाम का जिक्र किया है और उसे रेकोर्ड करके इधर सुनाने कि कोशिश कर रहा हूँ । अगर पूरानी रेकोर्डिंग मिल पायेगी तो कभी वह भी रखूँगा । वैसे एक बात खास कहूँगा कि एक बार वहाँ कि उद्दघोषिका श्रीमती पद्दमिनी परेराजी से मैनें शोर्ट वेव और मिडीयम वेव के लिये उपयोगमें भविष्यमें ली जाने वाली डी आर एम तक़निक के बारेंमें बात कि तब उन्होंने सीधी सी बात कही कि, उनके पास आज विज्ञापनो से होने वाली आमदानी एक पैसे की भी नहीं है तो वे लोग नयी तक़निक कहाँ से खरीद सकेंगे । आज भारतिय रिझर्व बेन्कने करीब १९६७ से ही विदेशी मूद्रा निती सख्त बना रखी है, विविध भारती को फायदा कराने की भी इसमें चाह होगी ही होगी । मुम्बई के एक मेरे मित्र श्री प्रभाकर व्यास तो करीब ७५ साल से भी ज्यादा उम्र के है वे श्री मनोहर महाजनजी के साथ मिल कर रेडियो सिलोन की हिन्दी सेवा को कैसे बचाया जाय और मजबूत किया जाय उसका अभियान चला रहे है । मैं मुम्बई उनके धर जा के आया हूँ और एक बार वे भी मेरे धर आ चूके है । कल म्रेरे घर राजकोट के श्री मधूसूदन भट्टजी भी आये थे । श्री प्रभाकर व्यास का सम्पर्क ०९२२३४८७५७९ पर हो सकता है । अब नीचे सुनिये मेरी श्रीमती ज्योति परमारजी के साथ हुई और आज सजीव प्रसारित हुई बातचीत |
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यहाँ मेरी आव।झ आपको मेरी और रेडियो से आने वाली थोडी दबल सुनाई पडेगी इस लिये थोडी चला ले ऐसी आशा रखता हूँ ।

4 comments:

Anonymous said...

आवाज स्पष्ट नहीं है इसीलिए मैं ठीक से नही सुन पाई .
आज सवेरे 8 बजे से मैनें सीलोन सुना दो संस्करणों के गीत बजे. सुनने में साफ उतना नहीं था.
इस बातचीत का सजीव प्रसारण कब हुआ.

mamta said...

आवाज कट सी रही है और रूक-रूक कर आ रही है।

हो सकता है प्रसारण ही ऐसा रहा होगा।

annapurna said...

पीयूष जी पहली टिप्पणी मेरी है.

PIYUSH MEHTA-SURAT said...

आदरणिय पाठक गण ,
आवाझ माईक्रोफोन रेकोर्डिंग के कारणसे सिर्फ़ मेरी दो आयेगी ही , क्यों की मेरे घ्रकी मेरी आवाझ और रेदियो से प्रसारित म्रएरी आवाअझ दोनों साथ हुई है । वह सजीव प्रसारण परसों दि. ६ के दिन रात्री ७ . २५ से रात्री ८.५५ तक था । मैनें पोस्ट के अन्त में ही लिखा है । अन्नपूर्णाजी का जिक्र किया हुआ दो पहलू वाला कार्यक्रम मैंने तो पूरा सुना और गाने बहोत ही सुन्दर थे । हेमन्त कूमार और तलत मेहमूद साहब के पूरूश आवाझी संस्करण ज्यादा थे । महिला स्वर लताजी आशाजी और गीताजी के ज्यादा तर थे । ९ से ९.३० तक तलत साहब के गैरफिल्मी गीत आये थे । आशा है कि श्री अन्नपूर्णाजी मेरी आवाझ में तो नहीं पर ज्योतिजी की आवाझमें अपना नाम सुन पायी होगी । मैनें उनको यही कहा था कि आप रेडियोनामा ब्लोग कि हमारी सह लेखिका है जो पूरानी पर नयी श्रोता है और रेदियो सिलोन के बारेमें आअप्ने सबसे ज्यादा लिखा है, जिस पर मैनें सबसे ज्यादा कोमेन्ट्स लिखे है ।

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आपकी टिप्पणी के लिये धन्यवाद।

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