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Friday, February 8, 2008

भारतीय ताल वाद्य और फिल्म संगीत

संगीत सरिता कार्यक्रम में इन दिनों एक बहुत अच्छी श्रंखला चल रही है - भारतीय ताल वाद्य और फिल्म संगीत जिसे प्रस्तुत कर रहे है कांचन (प्रकाश संगीत ) जी और उनके सहयोगी दिलीप ( कुलकर्णी ) जी और वीना ( राय सिंघानिया ) जी।

प्रसिद्ध तबला वादक श्री बाल कृष्ण अय्यर जी से निम्मी ( मिश्रा ) जी की बातचीत पर आधारित इस कार्यक्रम में ताल वाद्यों की जानकारी दी जा रही है।

शुरूवात में पखावाज की जानकारी दी गई जिसके बाद मृदंगम की। कई नई बातें सामने आई जैसे कि संस्कृत शब्द मृदा यानी मिट्टी से बने इस वाद्य का नाम इसीलिए मृदंगम है। वाद्यों की पूरी जानकारी के साथ-साथ जब वादक पार्थ सारथी जी और शेखर जी बजा कर सुनाते है तो सारी बातें बहुत अच्छी तरह से समझ में आ जाती है।

पिछली कडियों में तबले की जानकारी दी गई जिसमें कई बातें ऎसी थी जो शास्त्रीय सन्गीत की जानकारी नहीं पर रुचि रखने वालों के लिए उपयोगी रही जैसे तबले को कैसे बांधा जाता है और आटा लगाया जाता है।

इसी तरह उप ताल वाद्यों - खंजीरा और मोर सिंग (शायद लिखने में गलती हो ) के बारे में भी बताया गया कि इनका प्रयोग कर्णाटक संगीत में अधिक होता है। यहाँ यह नहीं बताया गया कि हिन्दुस्तानी भक्ति संगीत में जैसे मीरा और कबीर के भजनों में जिस मंजीरा का प्रयोग किया जाता है क्या यह और खंजीरा अलग है। मीरा के तो एक हाथ में तम्बूरा होता है और एक हाथ में मंजीरा.

इसी तरह सूफी फकीर भी चिमटा बजाते है। क्या यह भी ताल वाद्य है ?

आज तेरहवीं कडी में ढोल की बात हुई। महाराष्ट्र , गुजरात और पंजाब के ढोल और लोक संगीत की बात चली। पंजाब के गले में लटकाने वाले जिस छोटे ढोल की बात चली यही ढोल दखिनी लोक संगीत में भी है। हैदराबादी उर्दू यानी दखिनी जबान में लोक गीतों को तो ढोलक के गीत ही कहते है। इनमें से एक गीत फिल्म बाजार में पैमिला चोपडा और साथियो की आवाजों में है -

चले आओ सैंय्या रंगीले मैं वारी रे

आशा है आगे की कडियों में इस पर भी चर्चा होगी।

7 comments:

डॉ. अजीत कुमार said...

अन्नपूर्णा जी,
150वें चिठ्ठे की बधाई स्वीकारें.
यूँ तो मैं संगीत-सरिता सुनता नहीं हूँ, पर आपने जिस प्रकार से कार्यक्रम का विश्लेषण किया है, तो सुनने को जी करने लगा है.
आज ही जाना कि आप जिसे ढोलक के गीत कहती हैं,दरअसल आप लोकगीतों के बारे में कहती हैं.
धन्यवाद.

mamta said...

उत्तर भारत मे भी ढोलक का बहुत अधिक प्रयोग होता है खासकर शादी-ब्याह के मौकों पर।

annapurna said...

धन्यवाद अजीत जी, ममता जी !

Harshad Jangla said...

Annapurnaji

Is it not true that Meerabai had a Tambura and a "Kartaal" in other hand?
-Harshad Jangla
Atlanta, USA

सागर नाहर said...

मेरी तरफ से भी बधाई स्वीकार करें..

annapurna said...

सागर जी धन्यवाद !

हर्षद जी आप मीरा की तस्वीरें या फिल्में देखिए एक हाथ में तम्बूरा और एक हाथ में मंजीरा होगा.

Harshad Jangla said...

Annapurnaji
I have browsed many websites thru Google and saw some pictures of Meerabai. I have seen Kartaal in her one hand. Manjira has to be played with both hands and Kartal can be played with one. Narsinha Mehta of Gujarat also had a Kartaal. You may visit some sites to confirm this. Thanx.
-Harshad Jangla
Atlanta, USA
Feb 10 2008

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