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Monday, February 25, 2008

श्रोताओं से सीधे जुड़ती संगीत सरीता

फ़्यूज़न म्यूज़िक और भारतीय शास्त्रीय संगीत के मेल की जानकारी देती श्रृंखला सुर मंथन सुनी जिसे संगीत सरिता के लिए रूपाली रूपक ने वीणा राय सिंघानी के सहयोग से प्रस्तुत किया।

इस श्रृंखला में सुप्रसिद्ध बांसुरी वादक हरि प्रसाद चौरसिया ने विभिन्न रागों जैसे चारूकेशी आदि के लिए आरोह अवरोह के साथ दोनों तरह के संगीत की जानकारी दी। यह राग आधुनिक वाद्य यंत्रों पर फ़्यूज़न म्यूज़िक में भी सुनवाए गए।

जब बारी आई इन रागों पर फ़िल्मी गीत सुनवाने की तब उन्होंने कहा कि यह गीत सुनिए और इसका विवरण चिट्ठी लिख कर भेजिए या फोन पर बताइए। इस विवरण में श्रोताओं को बताना है कि गीत किसने गाया है और संगीतकार कौन है। गीत भी ऐसे लोकप्रिय सुनवाए गए जैसे -

देखा एक ख़्वाब तो ये सिलसिले हुए
दूर तक निगाह में है गुल खिले हुए

मैं सोच रही थी कि श्रृंखला के अंत में श्रोताओं की चिट्ठियां पढी जाएगी और उनके फोन काल सुनवाए जाएगें या कम से कम उनके नाम बताए जाएगें। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। कल इसकी आठवीं और अंतिम कड़ी प्रसारित हुई। इस कड़ी में भी गीत सुनवाया गया और श्रोताओं से विवरण बताने को कहा गया।

यहां तक कि न फोन नम्बर बताया गया न पता बताया गया। इस बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई। वैसे संगीत सरिता में यह अच्छी शुरूवात है।

3 comments:

mamta said...

पढ़कर लग रह है की संगीत सरिता मे भी कुछ बदलाव आ गए है।

मीनाक्षी said...

अन्नपूर्णा जी, कई दिनों से हम रेडियो ही सुन रहे हैं. कभी साउदी में अग्रेज़ी और अरबी और कभी यहाँ अपने हिन्दी के स्टेशन... श्रोताओं के फोन न आने की बात पढ़कर निराशा हुई..क्योंकि हम तो सोच रहे थे..कि यहाँ तो जानलेवा ट्रैफिक में रेडियो ही संजीवनी का काम करते हैं. आपको पढ़ती हूँ और सोचती हूँ शायद एक दिन हम भी आप जैसे लिख पाएँगे.

anitakumar said...

युनुस जी अब हमें ये गाना सुनने की हुड़क उठ रही है देखा एक ख्वाब तो ये सिलसिले हुए……ला ला ला ला ला ला
अन्नपूर्णा जी इस गाने की चर्चा के लिए धन्यवाद, मेरे पसंदीदा गानों में से एक

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