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Saturday, July 19, 2008

संगीत सरिता पर गूँज रहा है पटियाला घराने का सबरंग

विविध भारती का संगीत सरिता कार्यक्रम शास्त्र से रूबरू होने का
श्रेष्ठ माध्यम है. बरसों से कई शास्त्रीय संगीतप्रेमी सुबह साढ़े सात बजे
अपने रेडियो सैट से सट जाते हैं.इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी ताक़त
यह है कि कभी भी यह किसी तरह मोनोटनी नहीं परोसता.कभी
ख़याल गायकी के रंग हैं तो कभी ठुमरी के.कभी मौसमी रागों की
बात है तो कभी किसी वाद्य के बारे में विस्तार से जानकारी.साथ ही फ़िल्म
संगीत में यदि प्रस्तुत किये गये राग पर आधारित कोई गीत उपलब्ध
है उसे कार्यक्रम के अंत में लगभग सभी प्रस्तुतियों में सुनाया जाता है.
इससे वे श्रोता भी संगीत सरिता और शास्त्रीय संगीत की ओर आकृष्ट
होते हैं जो पूरी तरह् से भारतीय संगीत के शास्त्र से वाकिफ़ नहीं.

आइये अब इस पोस्ट के मकसद की ओर......
आज से दो तीन दिन पूर्व पटियाला घराने के मूर्धन्य गायक उस्ताद बड़े
ग़ुलाम अली खाँ साहब
की गायकी पर एकाग्र कार्यक्रम गायकी में सबरंग
का प्रसारण प्रारंभ हुआ है. इसकी प्रस्तोता हैं सुश्री छाया गांगुली.1995 में
पहली बार प्रसारित हुए इस कार्यक्रम में ख़ाँ साहब की गायकी पर प्रकाश
डाला है उस्ताद जी की गायकी के अग्रणी प्रस्तोता पं.अजय चक्रवर्ती ने.
अजयजी से बातचीत की है वरिष्ठ प्रसारणकर्ता मरहूम क़ब्बन मिर्ज़ा साहब ने.

शुरूआत में ख़याल गायकी के बारे में बताया गया और राग भूपाली में
निबध्द रचनाएँ सुनाईं गईं जो ख़ाँ साहब ने किसी प्रायवेट महफ़िल में
गाईं थीं.अभी बहुत सी कड़िया प्रसारित होना शेष हैं ज़रूर सुनें गायकी में सबरंग.
ये भी बता दें कि सबरंग उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली ख़ाँ साहब का तख़ल्लुस यानी
उपनाम था और सबरंग नाम से ही उस्ताद जी ने कई सुमधुर बंदिशे रचीं.

2 comments:

सजीव सारथी said...

वाह नई बात पता लगी आज की उस्ताद का कोई उपनाम भी था .....sanjay भाई शुक्रिया इस पोस्ट के लिए

yunus said...

वाकई सुंदर श्रृंखला है ये ।
संगीत सरिता तो हम तब से सुन और रिकॉर्ड कर रहे थे जब केवल श्रोता थे । ब्रॉडकास्‍टर नहीं ।

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