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Thursday, July 24, 2008

आराधना के रूप

रेडियोनामा पर आराधना का मतलब है भक्ति गीत।

आमतौर पर भक्ति गीतों के प्रसारण का समय सुबह ही होता है पर विविध भारती पर पहले शाम के समय सांध्य गीत कार्यक्रम में पन्द्रह मिनट के लिए फ़िल्मों से लिए गए भक्ति गीत प्रसारित होते थे। बहुत साल हुआ यह कार्यक्रम बन्द हो गया और जिसके बाद से ही हैदराबाद में ऐसा कार्यक्रम सुनने को नहीं मिला। हाँ… कभी-कभार इधर-उधर कुछ कार्यक्रमों में फ़िल्मी भक्ति गीत सुनवाए जाते है। लेकिन नियमित शाम में भक्ति गीत सुनना और फ़िल्मी भक्ति गीत सुनना दोनों ही हैदराबाद में बरसों से बन्द है।

तो यह था आराधना का एक रूप जहाँ फ़िल्मों से लिए गए भक्ति गीत प्रसारित होते थे। दूसरे रूप में वो भक्ति गीत आते है जिन्हें किसी कवि ने रचा है। यह कवि कबीर, सूर, तुलसी, मीरा, रसख़ान, रहीम भी है और कुछ ऐसे कवि भी जो भक्त कवियों के रूप में लोकप्रिय तो नहीं पर इनकी रचनाएँ अच्छी होती है। यही भक्ति गीत हम नियमित सवेरे छह से साढे छह बजे तक सुनते है। कार्यक्रम है - वन्दनवार।

वन्दनवार के बाद हैदराबाद में क्षेत्रीय कार्यक्रम में साढे छह बजे से सात बजे तक अर्चना कार्यक्रम में ऐसे ही तेलुगु भक्ति गीत सुनने को मिलते है जिनमें भक्त कवि अन्नमाचार्य की रचनाएँ बहुत लोकप्रिय है विशेषकर गायिका शोभा राजु की आवाज़ में जिसमें शास्त्रीय पुट है जैसे -

ब्रह्मम ओकटे
भला तनदनाना भला तनदनाना

यहाँ ओकटे का अर्थ है एक। ब्रह्मम यानि ईश्वर। ईश्वर एक है और भला तनदनाना रिदम है। और एक गीत है -

इदिगो अल्लदिगो श्री हरिदासमु

अर्थ है देखो वो देखो श्री हरिदास और आगे ईश्वर का बख़ान है। यह भक्त कवि हरिदास की रचना है।

अर्चना कार्यक्रम में इस तरह के भक्ति गीतों के अलावा आराधना का एक और रूप या तीसरा रूप सुनने को मिलता है। जैसे आज सुबह सुना श्री साईं चरित जिसमें साईं बाबा की महिमा गाई गई इसी तरह हनुमान चालिसा दुर्गा स्तुति आदि सुनवाए जाते है। अनुराधा पौड़वाल की तेलुगु में गाई शिव स्तुति भी सुनवाई जाती है। इसके अलावा बाईबिल के गीत भी प्रसारित होते है। कहने का मतलब ये कि किसी कवि द्वारा लिखित भक्ति रचनाओं के बजाए सीधे धार्मिक ग्रन्थों से ली गई भक्ति रचनाएँ भी सुनवाई जाती है।

यह तो बात हुई विविध भारती की अब एक नज़र आकाशवाणी हैदराबाद के क्षेत्रीय कार्यक्रम पर। हैदराबाद बी चैनल पर सुबह साढे छह बजे से आधे घण्टे के लिए कार्यक्रम होता है - ईश्वर अल्ला तेरो नाम जिसमें एक भजन, एक नाद या सूफ़ी क़व्वाली, एक शबद और बाइबिल के गीत शामिल होते है। एस तरह यह भक्ति संगीत का कार्यक्रम विविधता लिए होता है।

3 comments:

Udan Tashtari said...

आभार जानकारी के लिए.

डॉ. अजीत कुमार said...

आकाशवाणी के प्राईमरी केन्द्रों पर इसका एक रूप और भी है - रामचरित मानस पाठ. ये पाठ जाने कितनी अनजानी और लब्ध प्रतिष्ठित आवाजों में अबतक सुन चुका हूँ. मुकेश साहब, लता जी, रवीन्द्र साठे, सुरेश वाडकर... जाने कितने और.

योगेन्द्र मौदगिल said...

wah, adbhut
achhi jankai ke liye aabhar

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आपकी टिप्पणी के लिये धन्यवाद।

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