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Friday, September 28, 2007

मेहनाज़ अनवर से बातचीत

मेहनाज़ अनवर का नाम न सिर्फ़ पुरानी स्टाइल के रेडियो से जुड़ा हुआ है बल्कि वो FM सुननेवालों के लिये भी बेहद जाना-पहचाना नाम हैं. एफ़एम ब्रॊडकास्टिंग की जब शुरुआत हुई तो ग़ज़लों के प्रोग्राम आदाब और आदाब अर्ज़ है से उन्होंने नये सुनने वालों से एक बेहद अपनापे का रिश्ता बनाया, लोगों में ज़बान का शऊर पैदा किया और एक नये अन्दाज़-ए-बयां को मक़बूल बनाया. सुननेवालों से जज़्बाती रिश्ता बनाना कोई उनसे सीखे.वो जितनी दिलकश आवाज़ की धनी हैं उतनी ही खूबसूरत शख्सियत भी हैं.
आइये सुनतें हैं उन्ही की आवाज़ मे कुछ गुज़री बातें.पहला हिस्सा.






4 comments:

yunus said...

वाह इरफ़ान भाई । कमाल है । ये वो नाम हैं जो हमारे लिए काफी दूर की चीज़ लगते हैं । वैसे भी मुंबई में रहकर कहना पड़ता है दिल्‍ली दूर है । लेकिन आपकी वजह से दिल्‍ली हमारे करीब आ रही है । शुक्रिया नहीं कहूंगा बल्कि कहूंगा कि ये सिलसिला जारी रहे । ताकि शुक्रिया से कोई बड़ा लफ्ज़ ईजाद करना पड़े रेडियोनामा के दीवानों को । और हां लेबल की जगह अपना नाम भी लिखें तो होगा कि आपके नाम से पोस्‍टें पढ़ी जा सकेंगी ।

Anonymous said...

Radio has changed soo much over the years , these dayz when we are so used to jarring music, n loud presentation, Listening to a interview bite like ......i m short of words,....Or as the Shaayar has rightly put it ....

''Jaise sehrao mein haule se chale baade naseem
Jaise Beemaar ko bewajah qaraar aa jaye...

its a feel gud interview , and inspiring one

Its an excellent effort on ur part to let us relive those moments of past........
thanx

Anonymous said...

यह बात बिल्कुल सही है की मेहनाज़ अनवर जैसे लोग अब रेडियो की दुनिया में कम रह गए हैं | रेडियो की दुनिया में इंक़लाब के साथ नए लोगों ने नए अंदाज़ इख्तियार कर लिए | लेकिन अब भी अगर कोई रेडियो सुन कर सुकून पाने की तावाक्को रखता है तो वह मेहनाज़ जी का प्रोग्राम सुनता होगा |

इरफान भाई मैं आपका शुक्रगुजार हूँ की आपने हमे उनके बरे में जानने का मौका दिया|

Anonymous said...

I have grown up listening to hard rock and all non-stop talking station RJ's. But after listening to this interveiw bite, i emphatically belive that there are still people who are attached to their roots and respect that as well. Mehnaz Anwar is a name in itself and it was a splended feeling listening to her.

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