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Wednesday, September 19, 2007

हय्या ओ हय्या

जब देश भक्ति गीत माझी गीत बना और विविध भारती ने भूल सुधार किया !

बात उन दिनों की है जब स्कूल में सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए हम एक सामूहिक गान की तैयारी कर रहे थे । एक गीत हमारे हाथ लगा । पढ कर यूं लगा जैसे ये माझी गीत है । प्रस्तुति बहुत ज़ोरदार हो इसलिए हम अपनी ओर से कुछ जोड़ने भी लगे ताकि गीत बिल्कुल मल्लाहों का लगे ।

हमने जोड़ा - हय्या ओ हय्या

गीत का मुखड़ा कुछ यूं बना -

वह सावधान आया तूफ़ान
अब दूर नहीं किनारा
हय्या ओ हय्याSSSSSS हय्या ओ हय्या

इतना ही नहीं भय शब्द का प्रयोग दो बार होने पर एक बार भय और एक बार डर कर दिया । इस तरह अंतरा बना -

वीर बढ चलो धीर धर चलो
चीर चपल जल धारा
आ आ आ आ आ
वीर बढ चलो धीर धर चलो
चीर चपल जल धारा

है भय कोई
के कोई भय नहीं
है डर कोई
के कोई डर नहीं
अब दूर नहीं किनारा

हय्या ओ हय्याSSSSSS हय्या ओ हय्या

सामूहिक गान में शामिल हम सब सहेलियां विविध भारती सुना करती थी । एक दिन सुबह वन्दन्वार में भजनों के बाद उदघोषणा हुई अब आप शैलेन्द्र का लिखा देश भक्ति गीत सुनिए महेन्द्र कपूर और साथियों की आवाज़ों में । ये गीत सुना और हम आवाक्…

तब से आज तक कई बार यह गीत सुना । अभी एक-डेढ महीने पहले ही सुना था । जब भी सुनती हूं बीच-बीच में बरबस मुहं से निकल ही जाता है -

हय्या ओ हय्या

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2 comments:

नाहर said...

अन्नपूर्णा जी आपका स्वागत है, रेडियोनामा पर
आप विविध भारती की बहुत पुरानी श्रोता हैं, आप अपने अनुभवों को इसी तरह हम सबके बीच बाँटती रहिये।
धन्यवाद।

yunus said...

ये अच्‍छी रही । वाक़ई कई बार हमें जरूरत के मुताबिक गानों में संशोधन करना पड़ता है ।
आपको हैरत होगी, कई बार मैंने खुद गाने के अंतरों को अदल बदल के प्रसारित किया है । इसके लिए कंप्‍यूटर और कुशलता से काम लेना पड़ता है । कई बार गानों के इंटरल्‍यूड को खींचकर लंबा करना पड़ता है और कुछ ही लोग पहचान पाते हैं । ऐसे में आपने हैया हो हैया लगा दिया तो क्‍या हो गया । आगे भी रेडियोनामा पर हैया हो हैया करती रहिये । अन्‍नपूर्णा जी आपके पास तो अपने घर परिवार और रेडियो से जुड़ी अनगिनत यादें
हैं । हम रेडियोनामा पर आपकी अनगिनत पोस्‍टों के इंतज़ार में हैं । हैया हो हैया ।

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