सबसे नए तीन पन्ने :

Monday, January 28, 2008

अक्स और आवाज़

आज मैं क्षेत्रीय केन्द्र के एक कार्यक्रम के बारे में जानकारी देना चाहती हूं। आकाशवाणी हैदराबाद से पहले प्रसारित होता था एक कार्यक्रम - अक्स और आवाज़

जैसा कि नाम से ही समझा जा सकता है कि इस कार्यक्रम में अक्स और आवाज़ दोनों की चर्चा होती थी। 15 मिनट के इस कार्यक्रम में एक ही अक्स और एक ही आवाज़ के गीत सुनवाए जाते थे।

एक प्रसारण के बारे में बताऊं -

उदघोषणा हुई - आज के अक्स और आवाज़ कार्यक्रम में अक्स है रेखा का और आवाज़ है लता की। फिर तीन ऐसे गीत सुनवाए गए जो लता के गाए और रेखा पर फ़िल्माए गए थे जैसे घर फ़िल्म का गीत -

आजकल पांव ज़मीं पर नहीं पड़ते मेरे
बोलो देखा कभी तुमने मुझे उड़ते हुए

कार्यक्रम की ख़ास बात ये थी कि एकल (सोलो) गीत बजा करते थे ताकि एक ही अक्स और आवाज़ का आनन्द लिया जा सकें।

कुछ कार्यक्रम बहुत अच्छे लगे जिनमें अक्स और आवाज़ की ये जोड़ियां थी -

शम्मी कपूर और रफ़ी, राज कपूर और मुकेश, राजेश खन्ना और किशोर कुमार।

लता के नई पुरानी अलग-अलग नायिकाओं के साथ ऐसे कई कार्यक्रम हुए जैसे - मुमताज़, माला सिन्हा, वैजयन्ती माला, मीना कुमारी, मधुबाला, हेमामालिनी…

गीतों के साथ दोनों ही कलाकारों के बारे में थोड़ी सी जानकारी भी दी जाती थी। लेकिन ये कार्यक्रम लम्बे समय तक नहीं चल पाया।

5 comments:

mamta said...

कई बार कुछ कार्यक्रम ना जाने क्यों चल नही पाते है
इस कार्यक्रम के बारे मे कुछ याद नही है।

annapurna said...

ममता जी ये हमारा क्षेत्रीय कार्यक्रम है - आकाशवाणी हैदराबाद का।

Dr. Ajit Kumar said...

अन्नपूर्णा जी,
आपने बिल्कुल अच्छी पहल की है. अगर रेडियोनामा मंच है रेडियो का तो हम क्यों न इसका विस्तृत इस्तेमाल करें. क्या ये अच्छा नहीं हो कि अलग-अलग आकाशवाणी केन्द्रों या रेडियो स्टेशनों की बातें भी साझा करें?
धन्यवाद.

annapurna said...

अजीत जी शायद आपने मेरे सभी चिट्ठे नहीं पढे। मैनें रेडियोनामा पर अब तक 49 चिट्ठे लिखे है जिनमें से यहां का क्षेत्रीय केन्द्र यानि आकाशवाणी हैदराबाद से संबंधित 5 और रेडियो सिलोन से संबंधित 6 चिट्ठे है।

Dr. Ajit Kumar said...

अन्नपूर्णा जी,
रेडिओनामा और रेडिओवानी इन दोनों पर आने वाले पोस्ट्स को तो मैं हमेशा पढता हूँ, पर टिप्पणी कराने में कभी-कभी कंजूसी कर जाता हूँ. आपने ही तो रेडियो के विविध रंगों रूपों से रेडिओनामा की इस बगिया को महकाया हुआ है. मैंने जो बात लिखी है आप उसे सिर्फ़ इसी चिठ्ठे के लिए कतई ना लें.
धन्यवाद.

Post a Comment

आपकी टिप्पणी के लिये धन्यवाद।

अपनी राय दें