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Friday, January 11, 2008

रोज़ सवेरे के प्रसारण में एक बात खटकती है

विविध भारती पर रोज़ सवेरे प्रसारण शुरू होता है संकेत धुन (signature tune) से, फिर मंगल ध्वनि, फिर समाचार और समाचार के बाद वन्दनवार की संकेत धुन जिसे सुन कर लगता है कि भोर हो आई है और नए दिन की शुरूवात हुई है।

साढे छ्ह बजे देशगान के बाद इसी धुन से कार्यक्रम समाप्त होता है। इसके बाद यहां हैद्राबाद में क्षेत्रीय प्रसारण का कार्यक्रम है - अर्चना जिसमें तेलुगु भाषा के भक्ति गीत प्रसारित होते है। फिर सात बजे से हम जुड़ते है केन्द्रीय सेवा से भूले बिसरे गीत कार्यक्रम से।

साढे सात बजे के एल सहगल के गाए गीत से यह कार्यक्रम समाप्त होता है और बज उठती है संगीत सरिता की संकेत धुन जो हमें एक अलग ही दुनिया में ले जाती है।

जो संगीत के क्षेत्र में है शायद उनका यह रियाज़ का समय है और हम जैसे लोगों के लिए ये समय है ख़ास संगीत का आनन्द लेने का। पन्द्रह मिनट बाद इसी मधुर संकेत धुन से कार्यक्रम की समाप्ति की सूचना मिलती है। जिसके तुरन्त बाद बज उठती है त्रिवेणी की संकेत धुन।

हालांकि त्रिवेणी में तीन ही फ़िल्मी गीत बजते है जो अक्सर पूरे नहीं बजते मगर एक ही विषय पर बजते है। कहा भी जाता है उदघोषक द्वारा कि आज त्रिवेणी की तीनों धाराएं मिल रही है - (विषय) पर। कहने का मतलब ये कि तीन गीतों के कार्यक्रम के लिए भी संकेत धुन बजती है।

खटकने वाली बात ये है कि भूले बिसरे गीत कार्यक्रम के लिए संकेत धुन नहीं है। वैसे आम तौर पर फ़िल्मी गीतों के कार्यक्रम के लिए संकेत धुन बजाने का चलन नहीं है लेकिन इस कार्यक्रम में एक ख़ास दौर के गीत बजते है। ये गीत फ़िल्मी गीतों के इतिहास की जानकारी देते है, तो ऐसे कार्यक्रम के लिए एक संकेत धुन तो बनाई जा सकती है।

एक ऐसी धुन जिसे सुन कर ही लगे कि हम फ़िल्मी दुनिया के आरंभिक दौर में पहुँच गए है और फिर यही धुन के एल सहगल के गीत के बाद बजे जिसके बाद संगीत सरिता की धुन बज उठे तो सवेरे के प्रसारण में चार चाँद लग जाएगें।

2 comments:

mamta said...

विविध भारती वालों को आपके इस सुझाव पर ध्यान देना चाहिऐ।

सुबह तो हम रेडियो सुन नही पाते है क्यूंकि उस समय टहलने के लिए जाते है।

yunus said...

अन्‍नपूर्णा जी बिल्‍कुल सही सोचा है आपने ।
विविध भारती में भी ऐसा ही सोचा गया था कई बार ।
लेकिन भूले बिसरे गीत के साथ एक संकट है । ज़रा विस्‍तार से बात करनी होगी इस
पर । दिक्‍कत ये है कि भूले बिसरे गीत विविध भारती के सबसे लोकप्रिय कार्यक्रमों में से एक है । श्रोताओं की शिकायत ये रहती है, इसमें हम नाहक विज्ञापन, प्रोमो, ब्रेक वगैरह डालकर गानों का स्‍पेस खत्‍म कर देते हैं । इसलिए भूले बिसरे गीत की सिग्‍नेचर ट्यून का खयाल हर बार रद्द कर दिया जाता है । समस्‍या ये है कि रेडियो का यही प्राईम टाइम है । सारे विज्ञापन इसी अवधि के लिए बुक होते हैं । उन्‍हें काटा नहीं जा सकता । कारण आप जानती हैं । इसलिए गानों की तादाद भी थोड़ी कम हो जाती है । ऐसे में सिग्‍नेचर ट्यून लगाने का मतलब है लगभग एक या दो मिनिट ज़ाया करना । और सारे श्रोता इस अतिक्रमण पर नाराज़गी व्‍यक्‍त करेंगे । वैसे आपको बता दें कि श्रोताओं ने जब लगातार शिकायत की कि पुराने गानों की ज्‍यादा गुंजाईश नहीं है, तभी सदाबहार नग्‍मे शुरू हुआ और जब इससे भी लोगों को लगा कि पुराने गानों का कोटा कम है तो शुरू हुआ सुहाना सफर । मतलब हमारा अनुभव बताता है कि इस कार्यक्रम को छूने भर से करंट लग सकता है । हा हा हा ।

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