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Wednesday, March 12, 2008

सिलोन में जौहर के जौहर

शीर्षक पढ कर ही आपमें से बहुतों ने समझ लिया होगा कि आज मैं किसकी चर्चा कर रही हूँ। जी हाँ आज मैं चर्चा कर रही हूँ लोकप्रिय कलाकार आई एस जौहर की।

आई एस जौहर की जोड़ी महमूद के साथ ख़ूब सराही गई गोवा मुक्ति आन्दोलन की फ़िल्म जौहर महमूद इन गोवा में जिसके गाने सिलोन और विविध भारती पर ख़ूब धूम मचाते रहे। अब भी कभी-कभार भूले-बिसरे गीत में ये गाने बजते है।

इस फ़िल्म की सफ़लता के बाद इसी तर्ज पर हास्य फ़िल्म आई जौहर महमूद इन हाँगकाँग फिर जौहर साहब फ़िल्मों में हास्य भूमिकाओं में नज़र आए। सबसे अच्छी भूमिका रही फ़िल्म आज की ताज़ा ख़बर में।

इसी छवि के साथ जौहर अमीन सयानी के साथ सिलोन पर तशरीफ़ लाए। कार्यक्रम था जौहर के जवाब जो बिनाका गीत माला के पहले यानि हर बुधवार को पौने आठ से आठ बजे तक प्रसारित होता।

इस कार्यक्रम में अमीन सयानी जौहर साहब को आलीम फ़ाज़िल कहते जो उर्दू का शब्द है जिसका मतलब होता है विद्वान। एक विद्वान की तरह जौहर श्रोताओं के किसी भी सवाल का जवाब दिया करते थे।

यह एक प्रायोजित कार्यक्रम था। प्रायोजक कौन थे यह मुझे याद नहीं आ रहा। इस कार्यक्रम में श्रोताओं से कहा जाता कि उनके मन में उठने वाला कोई भी सवाल लिख कर भेजें जिसका जवाब जौहर देंगें। बीच-बीच में तीन गीत भी बजा करते। गीत तो पूरे नहीं बजते थे पर सवाल-जवाब से मेल खाते होते थे।

सवाल किसी भी तरह का होता था जैसे एक बार किसी ने पूछा कि दो बेटों की माँ किसे ज्यादा चाहती है बड़े बेटे को या छोटे बेटे को तो जौहर साहब ने जवाब के बदले सवाल किया कि आप अपनी दो आँखों में से किसे ज्यादा पसन्द करते है। बस इस सवाल में ही जवाब था।

कभी-कभार कुछ शरारती श्रोता कुछ अजीब सवाल पूछते जैसे गाय हरी घास खाती है पर सफ़ेद दूध क्यों देती है तो जौहर साहब जवाब देते यह सवाल आप गाय से कीजिए। मतलब जवाब गोल कर दिया गया पर हास्य की स्थिति बनी रही और कुछ विद्वतापूर्ण बातें भी होती।

कर्यक्रम के अंत में पढे जाने वाले तीन प्रश्नों के लिए पहला दूसरा और तीसरा ईनाम भी दिया जाता जो श्रोताओं को डाक से भेजा जाता था। इसके अलावा भी कुछ सवालों को चुना जाता पर समय कम होने से पढा नहीं जाता था पर कुछ ईनाम उन्हें भी भेजे जाते थे।

कुछ समय बाद ये कार्यक्रम बन्द हो गया। इसके बाद जौहर नज़र आए रविवार की सुबह एस कुमार्स का फ़िल्मी मुकदमा कार्यक्रम में जिसमें वो जज होते और वकील होते अमीन सयानी।

यह कार्यक्रम बाद में विविध भारती से भी प्रसारित होने लगा। इसकी कई कड़ियाँ पसन्द की गई। मुझे टुनटुन वाली कड़ी बहुत पसन्द आई जहाँ उन पर वकील ने आरोप लगाया था कि एक पार्टी में उन्होनें सारा ख़ाना खा लिया तो जज के सफ़ाई मांगने पर टुनटुन ने सफ़ाई दी कि वो तो सिर्फ़ चख़ा था।

एक अर्सा हो गया इस तरह के मनोरंजक कार्यक्रम सुने। आजकल तो किसी से बातचीत होती है तो नया कलाकार होने पर उसे प्रमोट करने की कोशिश होती है और पुराने कलाकार होने पर उनके अनुभव ही सुनने को मिलते है।

3 comments:

मीनाक्षी said...

अन्नपूर्णा जी, इतना सब याद रख पाने का क्या रहस्य हो सकता है..अक्सर हम सोचते हैं.

Anonymous said...

आदरणिय श्री अन्नपूर्णाजी,
नमस्कार,
आपने मेरी ही तरह रेडियो सिलोन को बहोत ही याद रखा है । यह बहोत ही आनंद की बात है । फर्क इतना है, कि आप जितना याद आ जाता है, वह लिखने की शुरूआत मूझसे पहेले करती है । और मैं कुछ: थोडी सी अधूरप जो आप को खूद को लगती है, मैं पूरी करता हूँ । इस जौहर के जवाब कार्यक्रम के प्रायोजक थे, जीप टोर्च और बेटरीयाँ बनाने वाले जीप इन्डस्ट्रीझ । आपसे बिनती है, कि आप बिनाका गीत माला वाली अपनी पोस्ट पर मेरी देरी से आयी अन्तिम टिपणी पढ़ ले ।जो मेरे यहाँ सुरतमें नहीं होने के कारण देर से आयी ।
आपको एक और बिनती है कि, कुछ: समयावधि के लिये हर बृहस्पतिवार रात्री ८ बजे नायलेक्स -६४४ और टेट्रेक्श -८६६ साडीयाँ के निर्माता –टोरे इन्डस्ट्रीझ-इनकोर्पोरेटेड जापान का प्रायोजित कार्यक्रम आता था, जो श्री अमीन सायानी साहब के आज तक़के सबसे बेहतरीन साथी रहे श्री ब्रिज भूषण साहब प्रस्तूत करते थे , दो बीचमें अनकी अनौपस्थितीमें श्री अमीन सायानी साहबने भी प्रस्तूत किया था । इस कार्यक्रममें जाने माने फिल्म निर्देषक अपनी कोई भी फिल्मों से दो गानो के फिल्मांकन के बारेमें बताते थे, कि इन गानों को इस तरह फिल्माने का ख़याल उनको कैसे आया । एक उदाहरण के रूपमें स्व. श्री राज खोसलाजीने फिल्म दो रास्ते के गीत ’बिन्दीया चमकेगी’ के बारेमें बताया था । आप इस कार्यक्रम के नाम पर रोशनी डालिये ।
पियुष महेता ।
सुरत-३९५००१.

PIYUSH MEHTA-SURAT said...

आदरणिय श्री अन्नपूर्णाजी,
नमस्कार,
आपने मेरी ही तरह रेडियो सिलोन को बहोत ही याद रखा है । यह बहोत ही आनंद की बात है । फर्क इतना है, कि आप जितना याद आ जाता है, वह लिखने की शुरूआत मूझसे पहेले करती है । और मैं कुछ: थोडी सी अधूरप जो आप को खूद को लगती है, मैं पूरी करता हूँ । इस जौहर के जवाब कार्यक्रम के प्रायोजक थे, जीप टोर्च और बेटरीयाँ बनाने वाले जीप इन्डस्ट्रीझ । आपसे बिनती है, कि आप बिनाका गीत माला वाली अपनी पोस्ट पर मेरी देरी से आयी अन्तिम टिपणी पढ़ ले ।जो मेरे यहाँ सुरतमें नहीं होने के कारण देर से आयी ।
आपको एक और बिनती है कि, कुछ: समयावधि के लिये हर बृहस्पतिवार रात्री ८ बजे नायलेक्स -६४४ और टेट्रेक्श -८६६ साडीयाँ के निर्माता –टोरे इन्डस्ट्रीझ-इनकोर्पोरेटेड जापान का प्रायोजित कार्यक्रम आता था, जो श्री अमीन सायानी साहब के आज तक़के सबसे बेहतरीन साथी रहे श्री ब्रिज भूषण साहब प्रस्तूत करते थे , दो बीचमें अनकी अनौपस्थितीमें श्री अमीन सायानी साहबने भी प्रस्तूत किया था । इस कार्यक्रममें जाने माने फिल्म निर्देषक अपनी कोई भी फिल्मों से दो गानो के फिल्मांकन के बारेमें बताते थे, कि इन गानों को इस तरह फिल्माने का ख़याल उनको कैसे आया । एक उदाहरण के रूपमें स्व. श्री राज खोसलाजीने फिल्म दो रास्ते के गीत ’बिन्दीया चमकेगी’ के बारेमें बताया था । आप इस कार्यक्रम के नाम पर रोशनी डालिये ।
पियुष महेता ।
सुरत-३९५००१.

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