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Wednesday, March 19, 2008

मेरी मुंबई यात्रा भाग -- अमीन सायानी के साथ दोपहर का भोजन और उनका वीडियो बनाने का सौभाग्‍य

सूरत निवासी पियूष मेहता रेडियोनामा के प्रेमी हैं । वे अकसर मुंबई आकर प्रसारण की दुनिया की जानी-मानी हस्तियों से मिलते हैं और उनसे बातें करते हैं । पियूष मेहता ने हाल ही में चोटी के ब्रॉडकास्‍टर अमीन सायानी से मुलाक़ात की है । आईये पियूष मेहता से उस मुलाक़ात का ब्‍यौरा जानें । पियूष भाई के आलेख को हमने संशोधित एवं परिवर्तित करके प्रकाशित किया है----यूनुस ।।



इस बार भी हमेशा की तरह मुंबई आने से पहले ही मैंने अमीन सायानी साहब से फोन पर सम्पर्क करके उनसे मिलने का समय तय करवाया लिया था । पर इस बार उन्‍होंने छब्‍बीस फरवरी को दोपहर साढ़े बारह बजे बुलवा लिया । और ये इसरार किया कि मैं दोपहर का भोजन उनके साथ करूं । और ये तस्‍दीक भी कर दी कि खाना शाकाहारी ही रहेगा । यानी मेरे मन का संशय भी अमीन साहब भी जान गये थे ।



अमीन साहब समय के पाबंद हैं । इसलिए मैंने इस बात का ख़ास ख्‍याल रखा था कि कहीं मुझे देरी ना हो जाए । मुझे इस बात की ज्‍यादा चिंता थी कि कहीं मेरे देर से पहुंचने के कारण अमीन साहब को अपने कामकाम में परेशानी ना हो । अमीन साहब के सहायक दिनेश भाई मुझे पहले से जानते हैं । कई बार अमीन साहब से मिलने जो आ चुका हूं मैं । बहरहाल....आधे घंटे पहले पहुंचने के बावजूद दिनेश जी को कोई दिक्‍कत नहीं हुई और उन्‍होंने बड़े आदर और खुशी से मेरा स्‍वागत किया ।



अब मैं अमीन साहब के कमरे में था । जाने माने ब्रॉडकास्‍टर अमीन सायानी को अपना काम करते हुए देख रहा था । बीच बीच में वो बातें भी कर रहे थे मुझसे । उनके बेटे राजिल को भी हमारे साथ ही भोजन करना था । लेकिन उनका फोन आ गया कि उन्‍हें देर हो सकती है । इसलिए तकरीबन एक बजे मैं और अमीन साहब रीगल टॉकीज़ के पास स्थित अपोलो होटेल में आ पहुंचे । अमीन साहब की सिन्‍सीयेरिटी देखिए कि कुक को बुलाकर उन्‍होंने कम मिर्च और कम तेल में अलग से भोजन तैयार करने के निर्देश भी दिये ।



मैंने झिझकते हुए कहा कि मैं उनकी वीडियो रिकॉर्डिंग करना चाहता हूं, जिसके लिये अमीन साहब सहर्ष तैयार हो गये । लेकिन उन्‍होंने कहा कि उनके स्‍टूडियोज़ या कार्यालय में ही वीडियो बनाना ज्‍यादा ठीक होगा । बातों बातों में मैंने अपने पुराने क़रीबी दोसत सुरेन्द्र रामसिंघानी का जिक्र किया जो किसी ज़माने में मुंबई के एम टी एन एल के कर्मचारी थे । मैंने अमीन साहब से बताया कि सुरेंद्र के साथ ही इत्‍तेफाक से मैं सबसे पहले उनसे मिला था । दरअसल अमीन साहब का हफ्ते भर से ख़राब था और वो काफी़ परेशान थे । सुरेंद्र ने अमीन साहब के कहने पर फटाफट एक घंटे में फोन  दुरूस्‍त करवा दिया था । जिसके बाद अमीन साहब ने सुरेंद्र को अपने दफ्तर में मिलने के लिए बुलवा लिया था । मैं भी सुरेंद्र के साथ था और पहली बार तब ही अमीन साहब से मिला था ।



इसी दौरान मैंने अमीन साहब की इजाज़त से सुरेंद्र को भी बुलवा लिया । और मेरे इसी मित्र की मदद से बातचीत का दृश्यांकन आप तक पहुंच रहा है ।  मैं आपको बताना चाहता हूं कि इस बातचीत को ASF फॉर्मेट से MPEG फॉर्मेट में बदलकर मैंने इसे चार् हिस्‍सों में बांटा है । फिर ई स्निप पर चढ़ाया है । हम पेशेवर फोटोग्राफर या सिनेमेटोग्राफर नहीं हैं । लेकिन इसे संपादित करते हुए मैंने ये ख्‍याल रखा है कि बीच बीच मं हो रही गुजराती बातचीत वैसी ही रहे । ताकि आपको सहज बातचीत का आनंद भी मिल सके । पूरा लोड होने तक आपको इंतज़ार करना होगा । तभी इसे बिना किसी बाधा के देख सकेंगे । उम्‍मीद है कि इस बातचीत को देखकर आपको आनंद आयेगा ।






भाग १


भाग २


भाग ३


भाग 4



इस बात के पूरी होने पर श्री सायानीजी ने प्यार से हम दोनों को विदा किया और अपनी केबिन में अपने कुछ दफ्तरी काम में जुट गये। परन्तु अमीन सायानी जी के सुपुत्र श्री राजिलजी ने बाहर के कमरे में अपना काम निपटाते हुए कुछ और समय हमारे साथ बहुत ही निजी़ मूड में बातें जारी रखी।
जैसा मैं आपको पहले बता चूका हूँ, उनसे भी मेरी पहचान रही है और अमीन साहब की तरह राजिल भी बहुत ही मिलनसार हैं। इस तरह करीब ४ बजे हम दोनों दोस्त अपने जीवन के बेहतरीन समय की यादों की बात करते हुए एक ही बस में बैठ कर बीचमें से अलग हो गये ।
रात्री को मैं अपने चचेरे भाई जतिन महेता, उसकी पत्नी श्रीमती रक्षा महेता और उसके बेटे मिलन महेता के यहाँ दो दिन के लिये रुकना हुआ। जतिन भाई मेरे सगे भाई नहीं है परन्तु हम दोनों में सम्बंध सगे से भी बढ़ कर है।
मेरे बहनोई श्री भगवान दास कापडिया (जो हकीकतमें मेरी फूफी की लडकी स्व. शारदा बहन के पति है), मेरे भांजे विनय कापडिया और उनकी पत्नी तृप्ती और उनके बेटे जैमीन के घर से चला। पाठको को इन सब नाम से कोई सीधा लेना देना तो नहीं है। पर जो पियुष महेता आप के सामने पेश हो रहा है, उनमें मुम्बई जैसे शहर में मिले इन सबके सहकार का मेरे मन महत्व होना चाहिए, वह तो आप भी मानेंगे । एक और कुटुम्ब भी है, जिनके नाम अगली पोस्ट में!
.....अगली पोस्ट विविध भारती की मुलाकात के बारे में।

4 comments:

सागर नाहर said...

पियुष भाई
यह कड़ी बहुत ही शानदार है, हमें तो आपसे ईर्ष्या हो रही है कि आफ अमीन साहब जैसी बड़ी हस्ती के साथ लंच कर आये।
वीडियो को इस्निप पर लोड करने की बजाय यू ट्यूब पर डालना सही रहता, परन्तु उसके लिये आपको वीडियो कटर की मदद से इस वीडियो के कई टुकड़े करने होंगे।
बाकी इतना बड़ा वीडियो कोई भी नहीं देख पायेगा, क्यों कि लोड होने में ही बहुत समय लग जायेगा।
दस्तक
तकनीकी दस्तक
गीतों की महफिल

anitakumar said...

अमीन सायनी हमारे भी पंसदीदा उदघोषक हैं। आप को उनसे मिलने का सौभाग्य प्राप्त है जान कर अच्छा लगा, बातचीत नहीं सुन पा रहे।

Harshad Jangla said...

Piyushbhai
Both clips are v good. I took just a few seconds to watch them.I am also an old fan of Ameenbhai.He mentioned about the program which has been begun in our Atlanta on a local radio station.On last Sunday, 16th March I have heard Ameenbhai taking interview with Ravi, the noted Music Director.
Thanx for the interesting blog.
Rgds.
-Harshad Jangla
Atlanta, USA
March 19 2008

mamta said...

पीयूष जी अमीन सायानी से आपकी मुलाकात पढ़कर अच्छा लगा।

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आपकी टिप्पणी के लिये धन्यवाद।

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