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Wednesday, March 19, 2008

सफल महिलाओं की गाथाएं

आप सबको होली मुबारक !

होलिका एक पौराणिक महिला चरित्र है। यह नकारात्मक चरित्र है परन्तु अंत में होलिका का जलना और उसी आग से प्रह्लाद का सुरक्षित निकलना बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। इस तरह होलिका के जलने से हमें संदेश मिला।

यह तो बात हुई पुराण की। अब एक नज़र इतिहास पर डालते है। हमारे देश के इतिहास में महिलाओं के ऐसे कई चरित्र है जो हमें प्रेरणा देते है। ऐसे चरित्रों को हम स्कूल कालेज की पाठ्य पुस्तकों में पढते है।

पाठ्य पुस्तकों के अलावा ऐसी जानकारी हमें सामान्य ज्ञान की पुस्तकों में और पत्र-पत्रिकाओं में मिलती है। मगर भागदौड़ के इस जीवन में इन बातों को ढूँढ कर पढना कुछ कठिन है।

विविध भारती का महिलाओं का कार्यक्रम है - सखि-सहेली जो सोमवार से शुक्रवार तक हर दिन अलग-अलग रूप में प्रसारित होता है। गुरूवार को सफल महिलाओं की गाथाएँ सुनाई जाती है।

इसका एक लाभ यह भी है कि जो छोटे कस्बों गाँवों में रहने वाले है जहाँ तक विविध भारती तो पहुँचती है पर पुस्तकें और पत्र-पत्रिकाओं का पहुँचना कठिन है और साथ ही ऐसे लोग भी जिन्हें पढने लिखने में कठिनाई होती है, इस कार्यक्रम से यह जानकारी प्राप्त कर लेते है।

इस कार्यक्रम में इतिहास की उन महिलाओं के बारे में भी बताया गया जो देश की आज़ादी के संघर्ष से जुड़ी थी जैसे हज़रत महल, ज़ीनत महल। इन महिलाओं द्वारा किए गए कामों की भी जानकारी दी गई जैसे पत्रिकाएं निकालना, हाथ से संदेश लिख कर जारी करना जो हज़ारों की संख्या में होते थे।

मुग़ल साम्राज्य से लेकर गाँधी जी के साथ काम करने वाली महिलाओं तक की जानकारी दी गई जैसे मीरा बाई जी रूस्तम जी कासा जिसने क्रान्ति का झण्डा तैयार करवाया।

कलकत्ता की सरला देवी चौधरानी जो विवेकानन्द की शिष्या रही और मैसूर की महारानी की सचिव रही जिसने परदा प्रथा उन्मूलन के लिए बहुत काम किया।

ये सब जानकारियां तो किसी किताब में मिल जाती है पर सखि-सहेली कार्यक्रम ने एक क़दम बढ कर काम किया है। हमारे समाज में ही हमारे आस-पास कुछ महिलाएं ऐसी भी है जिन्होनें समाज में एक उदाहरण प्रस्तुत किया।

एक ऐसी ही महिला की जानकारी इस कार्यक्रम में दी गई - निर्झरा देवी जिसने चपरासी से प्राचार्य तक का सफर तय किया। आर्थिक तंगी से कम उम्र में ही उन्हें पढाई छोड़ चपरासी की नौकरी करनी पढी। लेकिन पढने की लगन इतनी रही कि जिस कालेज में चपरासी रही वही से प्राइवेट पढाई करने के बाद पहले लेक्चरार फिर प्रिंसिपल बनी।

ऐसी सफल महिलाओं की गाथाओं से जो न सिर्फ़ इतिहास की है बल्कि हमारे आज के ही समाज की है, न सिर्फ़ महिलाओं को बल्कि पुरूषों को भी जीवन में प्रेरणा मिलती है।

तो… हमारी तो भई यही राय है कि हर गुरूवार विविध भारती पर दिन में तीन बजे से चार बजे तक सुनिए सखि-सहेली कार्यक्रम और प्रेरणा लीजिए और जीवन में आगे बढिए।

4 comments:

mamta said...

अन्नपूर्णा जी आपकी राय सर आंखों पर।

हाँ कल हमने सखी-सहेली सुना था जिसमे महिलाओं को कुछ कोर्स के बारे मे बताया जा रहा था।अगर आपको जानकारी हो तो बताइयेगा। क्यूंकि हमने पूरा कार्यक्रम नही सुना था।

anitakumar said...

काफ़ी अच्छा प्रोग्राम है सखि-सहेली॥

annapurna said...

ममता जी शायद आपने मेरा सखि-सहेली से संबंधित पिछला चिट्ठा नहीं पढा - क्या आप अपने करियर की योजना बना रहे है ? इसमें मंगलवार को प्रसारित होने वाले कार्यक्रम की जानकारी दी गई थी। आप हर मंगलवार सखि-सहेली कार्यक्रम में इस तरह की जानकारी ले सकते है।

अनिता जी धन्यवाद !

neeraj tripathi said...

निर्झरा देवी के बारे में पढ़कर बहुत अच्छा लगा...यही कुछ लोग अनेकों के प्रेरणास्रोत बनते हैं

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